
देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना 2026 के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत हो गई है। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने राजधानी स्थित लोक भवन में स्व-गणना कर इस महत्वपूर्ण अभियान का शुभारंभ किया। इसके साथ ही राज्यभर में नागरिकों के लिए स्वगणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो 10 अप्रैल से 25 अप्रैल तक जारी रहेगी।
इस दौरान प्रदेश के नागरिक जनगणना के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। स्वगणना के लिए कुल 33 सवाल निर्धारित किए गए हैं, जिनमें मकान की स्थिति, परिवार की संरचना, उपलब्ध सुविधाएं और संपत्ति से जुड़ी जानकारी शामिल है। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है, जिससे डेटा संग्रहण अधिक सटीक और पारदर्शी हो सके।
स्वगणना पूरी करने के बाद नागरिकों को एक यूनिक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी (SE ID) प्राप्त होगी। यह आईडी बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि 25 अप्रैल से 24 मई के बीच जब प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे, तब इसी आईडी के आधार पर डेटा को उनके सिस्टम में दर्ज कर अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस अभियान में राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां की हैं। जनगणना निदेशालय के अनुसार, निर्धारित अवधि के बाद प्रगणकों की टीमें प्रत्येक घर तक पहुंचकर जानकारी का सत्यापन करेंगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी परिवार या मकान जनगणना से छूट न जाए।
स्वगणना के तहत पूछे जाने वाले 33 सवालों को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे भवन की संरचना (फर्श, दीवार, छत की सामग्री), परिवार से संबंधित जानकारी (सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और लिंग), सामाजिक वर्ग, मकान का स्वामित्व, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं, शौचालय, रसोई और ईंधन का प्रकार, डिजिटल संसाधन (इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर) और वाहन संबंधी जानकारी आदि।
शाम के समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी स्वगणना प्रक्रिया में भाग लेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में शामिल होकर सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की डिजिटल जनगणना न केवल डेटा संग्रहण को आसान बनाएगी, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।




