
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति से जुड़े एक पुराने और चर्चित मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। आदेश चौहान को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने 2009 के प्रताड़ना प्रकरण में बरी कर दिया है। अदालत ने सुनवाई के बाद स्पष्ट कहा कि स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा दिया गया पूर्व निर्णय त्रुटिपूर्ण था, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है।
यह मामला वर्ष 2009 का है, जब विधायक की भांजी दीपिका ने अपने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ससुराल पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि कुछ ही समय बाद पीड़िता के ससुर ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि विधायक आदेश चौहान ने सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर उन्हें और उनके परिवार को अवैध रूप से हिरासत में रखा और प्रताड़ित किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बाद में केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने जांच के बाद विधायक, उनकी भांजी और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। लंबी सुनवाई के बाद स्पेशल सीबीआई मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 26 मई 2025 को सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए छह माह की सजा और जुर्माना सुनाया था।
इस फैसले के खिलाफ विधायक आदेश चौहान ने जिला एवं सत्र न्यायालय देहरादून में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर स्पेशल कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी।
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद पाया कि पूर्व आदेश में गंभीर त्रुटियां हैं। इसके चलते अदालत ने स्पेशल कोर्ट के निर्णय को निरस्त करते हुए विधायक आदेश चौहान समेत सभी सह-अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया।
इस फैसले से न केवल विधायक को बड़ी राहत मिली है, बल्कि मामले में आरोपी बनाए गए पुलिस अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों को भी राहत मिली है। लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण के समाप्त होने के साथ ही यह मामला अब कानूनी रूप से खत्म हो गया है।




