
सियोल/टोक्यो। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। North Korea ने शनिवार को पूर्व दिशा की ओर लगभग दस बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद South Korea, Japan और क्षेत्र के अन्य देशों में सुरक्षा चिंताएं तेज हो गई हैं। दक्षिण कोरिया की सेना और संयुक्त सेनाध्यक्षों के अनुसार ये मिसाइलें राजधानी क्षेत्र के सुनान इलाके से दागी गईं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मिसाइलें स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 1 बजकर 20 मिनट पर लॉन्च की गईं और पूर्वी सागर की दिशा में गईं। अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कम से कम एक मिसाइल संभवतः लंबी दूरी की श्रेणी की हो सकती है।
जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी मिसाइल परीक्षण की पुष्टि की है। मंत्रालय के अनुसार उत्तर कोरिया की ओर से छोड़ी गई एक मिसाइल समुद्र में गिर गई, हालांकि वह जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर गिरी है। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं मिली है।
घटना के बाद जापान सरकार ने तुरंत आपात प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय कर दिया। जापान के प्रधानमंत्री Sanae Takaichi के कार्यालय ने सुरक्षा एजेंसियों को विमान, जहाज और अन्य सैन्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक सावधानी उपाय लागू करने को कहा गया है।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह मिसाइल गतिविधि ऐसे समय सामने आई है जब हाल ही में प्योंगयांग ने सियोल की शांति पहल को भ्रामक और छलपूर्ण बताया था। उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास का विरोध करता रहा है।
दरअसल, इस समय United States और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। प्योंगयांग का आरोप है कि ये अभ्यास उसके खिलाफ सैन्य आक्रमण की तैयारी के समान हैं, जबकि वाशिंगटन और सियोल का कहना है कि यह अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति के हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए किए जाते हैं।
इस बीच कूटनीतिक स्तर पर भी नई अटकलें सामने आई हैं। दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री Kim Min Seok ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का मानना है कि उत्तर कोरिया के नेता Kim Jong Un के साथ एक और शिखर वार्ता उपयोगी हो सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं और कई देश कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के इस तरह के मिसाइल परीक्षण अक्सर रणनीतिक संदेश देने के लिए किए जाते हैं। इसके माध्यम से प्योंगयांग अपनी सैन्य क्षमता और प्रतिरोधक शक्ति का प्रदर्शन करता है।
विश्लेषकों के अनुसार इस घटना से अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य सहयोग और मजबूत हो सकता है। वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में हथियारों की होड़ और सैन्य प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
कुल मिलाकर उत्तर कोरिया की यह मिसाइल गतिविधि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शक्ति संतुलन और सुरक्षा नीति पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। आने वाले समय में यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति को नई दिशा दे सकता है।







