
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने कैश क्रेडिट (CC) लिमिट बढ़ाने में अनावश्यक देरी को सेवा में कमी मानते हुए यूको बैंक को ग्राहक को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। आयोग ने मानसिक कष्ट के लिए 10 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये अतिरिक्त देने का निर्देश भी दिया है। निर्धारित 30 दिन की अवधि में भुगतान न करने पर संपूर्ण राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
लाटूश रोड ओल्ड निवासी एवं एडीएजीई फर्म की प्रोपराइटर स्वप्ना गर्ग ने 27 फरवरी 2024 को आयोग के समक्ष वाद दाखिल किया था। उन्होंने यूको बैंक की लखनऊ विवि शाखा, गोमतीनगर स्थित जोनल ऑफिस और बैंक के कोलकाता स्थित लीगल विभाग को विपक्षी पक्ष बनाया था।
स्वप्ना गर्ग ने अपने वाद में बताया कि उन्हें जुलाई 2022 में 12 लाख रुपये की सीसी लिमिट स्वीकृत हुई थी। अगस्त 2023 में उन्होंने इसे 25 लाख रुपये तक बढ़ाने हेतु आवेदन किया। बैंक नियमों के अनुसार इसका निस्तारण तीन सप्ताह में होना चाहिए था, लेकिन बार-बार याद दिलाने के बावजूद लिमिट में बढ़ोतरी नहीं की गई।
देरी की वजह से उन्हें बड़ी वित्तीय हानि झेलनी पड़ी और सामग्री सप्लाई के कई ऑर्डर रद्द करने पड़े, जिनकी कुल राशि 23 लाख रुपये से अधिक थी। वाद में उन्होंने 20 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की। बैंक की ओर से बताया गया कि 15 सितंबर 2023 को लिमिट बढ़ा दी गई थी, लेकिन ग्राहक के खाते में बढ़ी राशि का समुचित क्रेडिट नहीं दिखाई दिया, जिसके कारण ग्राहक को लेनदेन में कठिनाई का सामना करना पड़ा।
मामले की संपूर्ण सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष अमरजीत त्रिपाठी और सदस्य प्रतिभा सिंह ने 14 नवंबर को जारी आदेश में सेवा में कमी को स्पष्ट मानते हुए बैंक को संयुक्त और एकल रूप से क्षतिपूर्ति के आदेश दिए। आयोग ने कहा कि बैंक की देरी ने ग्राहक के व्यापारिक कार्यों को गंभीर रूप से प्रभावित किया और मानसिक तनाव भी उत्पन्न किया, जिसके लिए बैंक जिम्मेदार है।
निर्णय के बाद इस मामले को उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के एक मजबूत उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने बैंकिंग सेवाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया है।






