
देहरादून। लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज कार्यालय से पांच हाथी दांत चोरी होने के मामले में वन विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब इस मामले की तस्करी के एंगल से भी पड़ताल की जाएगी। विभाग यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि चोरी की घटना के पीछे वन्यजीवों के अंगों की तस्करी से जुड़ा कोई नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। मामले की जांच एसडीओ कोटद्वार को सौंपी गई है।
वन विभाग के अनुसार, लालढांग रेंज कार्यालय से पांच हाथी दांत गायब हुए हैं, जिनका कुल वजन 35 किलो से अधिक बताया जा रहा है। इस मामले में विभाग ने एचटू केस दर्ज किया है। जांच में हाथी दांत चोरी के साथ वन्यजीवों के अंगों की तस्करी और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
प्रभारी डीएफओ तरुण एस ने बताया कि मामले की जांच एसडीओ कोटद्वार को सौंपी गई है। जांच अधिकारी चोरी की परिस्थितियों के साथ तस्करी से जुड़े संभावित पहलुओं की भी पड़ताल करेंगे।
पहले भी सामने आ चुके हैं हाथी दांत तस्करी के मामले
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उत्तराखंड में इससे पहले भी हाथी दांत की तस्करी और अवैध रूप से रखे जाने के मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2023 में रामनगर में वन विभाग की टीम ने एक तस्कर से हाथी दांत बरामद किया था। उसकी सूचना के आधार पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की एक चौकी में अवैध रूप से रखे गए हाथी दांत भी बरामद किए गए थे।
वर्ष 2024 में एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम ने श्यामपुर में तस्करों को हाथी दांत के साथ पकड़ा था। इसके अलावा इसी साल मई में ऊधमसिंह नगर में सात किलो से अधिक हाथी दांत बरामद किया गया था। इन घटनाओं के बीच लालढांग रेंज कार्यालय से पांच हाथी दांत चोरी होने की घटना ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
वन्यजीव अंगों का रिकॉर्ड जुटा रहा मुख्यालय
इस मामले के बाद वन मुख्यालय ने प्रदेश के सभी वन प्रभागों से हाथी दांत समेत अन्य वन्यजीव अंगों का ब्योरा मांगा है। प्रदेश के 44 वन प्रभागों के अलावा कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित विभिन्न अभयारण्यों में जब्ती या अन्य कार्रवाई के दौरान बरामद वन्यजीव अंग कार्यालयों में रखे जाते हैं।
इनकी संख्या और उपलब्धता की पूरी जानकारी फिलहाल वन मुख्यालय के पास उपलब्ध नहीं होती। प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल ने बताया कि वन्यजीव अंगों से संबंधित रिकॉर्ड प्रभाग स्तर पर रखा जाता है। मुख्यालय ने सभी प्रभागों से इसकी जानकारी मांगी है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में जारी नियमों के आधार पर इन वन्यजीव अंगों के निस्तारण को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग अब उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान कर यह जानकारी जुटाएगा कि अलग-अलग कार्यालयों और संरक्षित क्षेत्रों में कितने वन्यजीव अंग रखे गए हैं।





