
उत्तरकाशी। केदारताल क्षेत्र में लापता आठ पर्वतारोहियों की तलाश के लिए मंगलवार को मौसम साफ होने के बाद रेस्क्यू अभियान फिर शुरू कर दिया गया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, संकरी घाटी और करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन ने हवाई और पैदल, दोनों माध्यमों से तलाश करने की रणनीति तैयार की है।
जिला प्रशासन के अनुसार, एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की 10 सदस्यीय प्रशिक्षित टीम को हेलिकॉप्टर से संबंधित क्षेत्र में उतारा गया है। टीम सुबह से ही लापता पर्वतारोहियों की तलाश में जुटी है। इसके साथ ही गंगोत्री नेशनल पार्क की टीम भी नीचे की ओर से आगे बढ़कर खोजबीन करेगी। यह टीम उन खोह, गुफाओं और अन्य सुरक्षित स्थानों की तलाश करेगी, जहां पर्वतारोही आश्रय ले सकते हैं।
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संकरी घाटी के कारण हेलिकॉप्टर से तलाश मुश्किल
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि केदारताल का क्षेत्र भौगोलिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है। यहां घाटी संकरी होने के कारण हेलिकॉप्टर से नीचे उतरना और आसपास के क्षेत्र को देखना कठिन है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
उन्होंने पिछले महीने उत्तरकाशी जिले में कालिंदी पास (कालिंदी खाल) ट्रैक के पास हुए रेस्क्यू अभियान का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां का क्षेत्र अपेक्षाकृत खुला और चौड़ा था। इस कारण हेलिकॉप्टर को उतारना और ऊपर से फंसे लोगों की स्थिति देखना आसान था। इसके विपरीत केदारताल क्षेत्र में संकरी घाटी होने से बचाव अभियान अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
जमीन और हवाई मार्ग से तलाश की तैयारी
प्रशासन ने बचाव अभियान के लिए दो स्तरों पर काम शुरू किया है। एसडीआरएफ और निम की टीम हेलिकॉप्टर के माध्यम से संबंधित स्थान पर पहुंचकर तलाश कर रही है। वहीं, गंगोत्री नेशनल पार्क के कर्मचारी नीचे की ओर से दुर्गम रास्तों पर आगे बढ़ेंगे और संभावित आश्रय स्थलों की जांच करेंगे।
जिलाधिकारी के अनुसार, जरूरत पड़ने पर अन्य टीमों की भी सहायता ली जाएगी। मौसम साफ होने के बाद अभियान दोबारा शुरू किया गया है और बचाव दल लापता पर्वतारोहियों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं।
27 अक्तूबर को ट्रैक पर गया था दल
जानकारी के अनुसार, 27 अक्तूबर को 12 लोगों का दल केदारताल ट्रैक पर गया था। दल में शामिल पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के सात ट्रैकर तथा एक गाइड भारी हिमस्खलन के बाद भोजखड़क के आसपास फंस गए थे। तीन पोर्टर और एक रसोइया दल से आगे थे और 30 अक्तूबर को सुरक्षित गंगोत्री पहुंच गए थे। उन्होंने ही गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों को घटना की सूचना दी थी।
इसके बाद से एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और वन विभाग की टीमें लापता पर्वतारोहियों की तलाश कर रही हैं। दुर्गम क्षेत्र और मौसम की परिस्थितियों के कारण अभियान में लगातार चुनौतियां आ रही हैं। फिलहाल सभी आठ पर्वतारोहियों की तलाश जारी है।





