
देहरादून। उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कार बीमा मुआवजे को लेकर अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बीमा पॉलिसी में वाहन की घोषित बीमित कीमत यानी इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (आईडीवी) से अधिक मुआवजा नहीं दिया जा सकता। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग, ऊधम सिंह नगर के उस फैसले को संशोधित कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी को कार की बीमित राशि से अधिक भुगतान करने का आदेश दिया गया था।
राज्य आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति कुमकुम रानी और सदस्य बीएस मनराल की पीठ ने फोर्ड फिगो कार से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद मुआवजे की राशि घटाकर 2.69 लाख रुपये कर दी। हालांकि, आयोग ने जिला आयोग के सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेश को बरकरार रखा।
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हादसे में पूरी तरह जल गई थी कार
यह मामला ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी ऋषभ से जुड़ा है। उन्होंने अपनी फोर्ड फिगो कार का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से 3,25,000 रुपये की बीमित राशि पर बीमा कराया था।
अगस्त 2016 में सड़क दुर्घटना के दौरान अचानक सामने आए जानवर को बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित होकर खंती में गिर गई। इसके बाद कार में आग लग गई और वह पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई।
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हादसे के बाद ऋषभ ने बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत किया। हालांकि, कंपनी ने सर्वेक्षक की रिपोर्ट और कुछ तकनीकी कमियों का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में सेवा में कमी की शिकायत दर्ज कराई।
जिला आयोग ने दिया था 3.50 लाख रुपये देने का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद 25 मार्च 2022 को शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया था। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को 3,50,000 रुपये का मुआवजा सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था। इसके अलावा पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देने को कहा गया था।
हालांकि, वाहन की बीमित घोषित कीमत 3.25 लाख रुपये थी, जबकि जिला आयोग ने मुआवजे की राशि 3.50 लाख रुपये निर्धारित की थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपील दायर की।
राज्य आयोग ने मुआवजा घटाकर 2.69 लाख रुपये किया
अपील पर सुनवाई के दौरान राज्य आयोग ने पाया कि वाहन की बीमित घोषित कीमत 3,25,000 रुपये थी, जबकि जिला आयोग ने इससे अधिक 3,50,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
राज्य आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता वाहन की आईडीवी से अधिक राशि का हकदार नहीं हो सकता। इसी आधार पर जिला आयोग के फैसले में संशोधन करते हुए मुआवजे की राशि घटाकर 2,69,000 रुपये कर दी गई।
हालांकि, आयोग ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता की सहमति के बाद भी बीमा कंपनी ने समय पर क्लेम का भुगतान नहीं किया। इस आधार पर जिला आयोग द्वारा निर्धारित सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च के आदेश को बरकरार रखा गया।
पीएनबी को भी राहत, उपभोक्ता शिकायत खारिज
एक अन्य मामले में उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को राहत देते हुए आलोक कुमार त्यागी की उपभोक्ता शिकायत खारिज कर दी। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग के छह जनवरी 2022 के आदेश को भी रद्द कर दिया।
यह मामला मेसर्स अर्चना एंटरप्राइजेज के बैंक खाते से संबंधित था। जिला आयोग ने बैंक को करीब 2.27 लाख रुपये ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए पांच हजार रुपये देने को कहा गया था।
राज्य आयोग ने इस आदेश को रद्द करते हुए शिकायत खारिज कर दी। उपलब्ध जानकारी में इस मामले में शिकायत खारिज करने के विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं है।
बीमा विवादों में फैसले का महत्व
कार बीमा से जुड़े मामले में राज्य आयोग का फैसला बीमित घोषित कीमत और मुआवजे की सीमा के बीच संबंध को रेखांकित करता है। इस मामले में आयोग ने मुआवजे की राशि घटाई, लेकिन बीमा कंपनी की ओर से भुगतान में देरी के लिए ब्याज और मुकदमा खर्च का आदेश बरकरार रखा।
वहीं, पीएनबी से जुड़े मामले में जिला आयोग का आदेश रद्द होने के बाद बैंक को राहत मिली है। दोनों मामलों में राज्य आयोग के फैसलों से संबंधित पक्षों के लिए आगे की कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।





