
रुद्रप्रयाग। चारधाम यात्रा के समापन की प्रक्रिया के बीच द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथि निर्धारित कर दी गई है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित मद्महेश्वर धाम के कपाट 16 नवंबर 2026 को बंद किए जाएंगे। इसके बाद भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी।
विजयदशमी पर्व के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कपाट बंद होने की तिथि तय की गई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कपाट बंद होने के बाद भगवान की चल विग्रह डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होगी।
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चार दिनों में ऊखीमठ पहुंचेगी भगवान की डोली
मद्महेश्वर धाम के कपाट बंद होने के बाद डोली की यात्रा निर्धारित पड़ावों के अनुसार पूरी होगी। कार्यक्रम के मुताबिक, 16 नवंबर को डोली का रात्रि विश्राम गौंडार गांव में होगा। इसके बाद 17 नवंबर को डोली गौंडार से रांसी के लिए प्रस्थान करेगी।
18 नवंबर को डोली रांसी से गिरिया पहुंचेगी। इसके अगले दिन, 19 नवंबर को भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली गिरिया से रवाना होकर ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी। यहां भगवान मद्महेश्वर की शीतकालीन पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
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पंचकेदार में द्वितीय केदार के रूप में प्रसिद्ध है मद्महेश्वर
भगवान मद्महेश्वर का धाम पंचकेदारों में द्वितीय केदार के रूप में प्रसिद्ध है। हर साल यात्रा काल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्त्व के कारण यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
सर्दियों में क्षेत्र में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की संभावना के चलते परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद भगवान मद्महेश्वर की पूजा-अर्चना शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में की जाती है।
शीतकालीन पूजा ऊखीमठ में होगी
मद्महेश्वर धाम के कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान के दर्शन और शीतकालीन पूजा-अर्चना कर सकेंगे। डोली के 19 नवंबर को ऊखीमठ पहुंचने के साथ ही शीतकालीन पूजा की व्यवस्था निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी।
चारधाम यात्रा के समापन के साथ ही उत्तराखंड के प्रमुख धामों में शीतकालीन पूजा की तैयारियां भी पूरी की जा रही हैं। मद्महेश्वर धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने से श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा की योजना बनाने में मदद मिलेगी।





