
देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के अंतिम चरण में निर्वाचन आयोग ने पांच जिलों में मतदाता सूचियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों में उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से भी मिलान किया जाएगा। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR-2026 के लिए अलग पोर्टल और जिला स्तर की व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
इस प्रक्रिया के तहत डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्री (DSE) विद फोटोग्राफिक सिमिलर एंट्री (PSE) की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे मतदाताओं की पहचान और सत्यापन करना है, जिनके नाम समान या मिलते-जुलते विवरण के साथ एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज हो सकते हैं।
पांच जिलों में विशेष सत्यापन
निर्वाचन आयोग के स्तर पर यह प्रक्रिया उत्तराखंड के उन पांच जिलों में शुरू की जा रही है, जहां उत्तर प्रदेश से लोगों का आवागमन और निवास संबंधी जुड़ाव अधिक है। इनमें देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर शामिल हैं।
SIR के दौरान ऐसे मामलों की जानकारी सामने आने के बाद अब संबंधित मतदाता सूचियों का मिलान किया जा रहा है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज न रहे।
BLO एप के जरिए होगी जांच
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के अनुसार, BLO एप पर इस सत्यापन के लिए लिंक उपलब्ध कराया गया है। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) अपने क्षेत्र में ऐसे मतदाताओं की जानकारी देख सकेंगे, जिनके नाम उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की सूची में भी दर्ज पाए जाते हैं।
इसके बाद BLO संबंधित मतदाता से संपर्क कर उसके नाम की स्थिति का सत्यापन करेंगे। यदि मतदाता उत्तराखंड की मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखना चाहता है तो आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि वह उत्तराखंड में नाम नहीं रखना चाहता है तो नाम हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-7 भरवाया जाएगा।
यूपी की सूची से नाम हटाने के लिए भेजा जाएगा पत्र
यदि किसी मतदाता का नाम उत्तराखंड की मतदाता सूची में रखने का निर्णय होता है, तो संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) की ओर से उत्तर प्रदेश के संबंधित ERO को पत्र भेजे जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बाद संबंधित मतदाता का नाम वहां की मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
इस तरह सत्यापन के बाद मतदाता का नाम केवल एक स्थान की मतदाता सूची में बनाए रखने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
एक से अधिक स्थान पर नाम दर्ज होने पर कानूनी प्रावधान
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज होने को लेकर प्रावधान हैं। इसलिए SIR के दौरान मतदाता सूचियों के मिलान और सत्यापन का उद्देश्य रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाना तथा दोहरे नामों की स्थिति को दूर करना है।
निर्वाचन आयोग SIR-2026 के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित विभिन्न दस्तावेज, ड्राफ्ट रोल और जिला स्तर की जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा रहा है।
मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है
यदि किसी मतदाता का नाम उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों जगह दर्ज है, तो उसे सत्यापन के दौरान संबंधित BLO को सही स्थिति की जानकारी देनी होगी। मतदाता सूची में नाम बनाए रखने और हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और दस्तावेजों के आधार पर पूरी की जाएगी। निर्वाचन आयोग की मतदाता सेवाओं के माध्यम से नागरिक अपनी मतदाता सूची में नाम और संबंधित विवरण भी देख सकते हैं।




