
गांधीनगर। गुजरात के सहकारी क्षेत्र में हाल के चीनी मिल चुनावों ने राज्य की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। खासतौर पर बारडोली और सायन की चीनी सहकारी समितियों में भाजपा समर्थित पैनलों को मिली हार ने पार्टी के सामने संगठनात्मक स्तर पर चुनौती पेश की है। इन चुनावों में विरोधी पैनलों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के साथ भाजपा से जुड़े बागी नेता भी शामिल रहे।
बारडोली की प्रसिद्ध श्री खेदुत सहकारी खांड उद्योग मंडली लिमिटेड, जिसे आमतौर पर बारडोली शुगर के नाम से जाना जाता है, में भाजपा समर्थित सहकार पैनल को 15 में से सिर्फ दो सीटें मिलीं, जबकि किसान परिवर्तन पैनल ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां लंबे समय से भाजपा समर्थित गुट का प्रभाव रहा है।
बारडोली शुगर में भाजपा समर्थित पैनल को बड़ा झटका
बारडोली शुगर के चुनाव में किसान परिवर्तन पैनल ने 13 सीटें जीतकर बोर्ड में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इस पैनल में कांग्रेस से जुड़े उम्मीदवारों के अलावा भाजपा के बागी नेता भी शामिल थे।
चुनाव में भाजपा के बारडोली विधायक ईश्वर परमार को भी हार का सामना करना पड़ा। वह कांग्रेस उम्मीदवार तरुण वाघेला से चुनाव हार गए। खास बात यह है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में परमार ने वाघेला को हराया था।
बारडोली में भाजपा के अंदर के कुछ नेताओं की ओर से भी बगावत को समर्थन मिलने की बात सामने आई है। परिवर्तन पैनल से चुने गए लोगों में सूरत जिला पंचायत की भाजपा अध्यक्ष भाविनी पटेल के पति अतुल पटेल भी शामिल हैं।
सहकारी क्षेत्र में राजनीतिक दखल पर सवाल
बारडोली शुगर के निवर्तमान वाइस-चेयरमैन और सूरत जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष भावेश पटेल ने चुनाव परिणामों को सहकारी संस्थाओं में बढ़ती राजनीतिक दखलंदाजी से जोड़कर देखा। उनके अनुसार पहले चीनी सहकारी संस्थाओं के चुनावों में राजनीतिक हस्तक्षेप कम था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मंच बन गए हैं।
उन्होंने भाजपा के अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद को परिवर्तन पैनल के उभरने की एक वजह बताया। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है और चुनाव परिणामों के राजनीतिक अर्थ को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने दृष्टिकोण हो सकते हैं।
सायन शुगर में भी कमजोर हुई पकड़
सूरत जिले की सायन शुगर में भी भाजपा समर्थित पैनल को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। यहां विकास पैनल ने 18 में से छह सीटें जीतीं, जबकि परिवर्तन पैनल के खाते में नौ सीटें गईं। तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
चुनाव परिणाम के बाद 2 सितंबर को चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन पदों को लेकर विवाद की स्थिति बनने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार भाजपा नेताओं की ओर से पार्टी मैंडेट जारी करने का प्रयास किए जाने पर निर्वाचित सदस्यों ने इसका विरोध किया और कहा कि पदाधिकारियों का चयन निर्वाचित संस्था का अधिकार है।
कांग्रेस नेता और सायन कोऑपरेटिव के निर्वाचित सदस्य दर्शन नाइक ने भी सहकारी चुनावों के राजनीतिकरण का आरोप लगाया। उनके अनुसार सहकारी संस्थाओं की स्थापना किसानों के हित और सामाजिक जिम्मेदारी के उद्देश्य से हुई थी।
छह सहकारी समितियों में हुए चुनाव
अगस्त में राज्य की छह सहकारी चीनी समितियों में चुनाव हुए। इनमें से दो स्थानों पर भाजपा समर्थित पैनलों को विरोधी पैनलों से हार मिली। विरोधी पैनलों में भाजपा के बागी नेताओं की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया।
हालांकि सभी जगह भाजपा को नुकसान नहीं हुआ। पार्टी समर्थित पैनलों ने भरूच, गांदेवी और कामरेज जैसी सहकारी समितियों में अपना नियंत्रण बनाए रखा। इन संस्थाओं में भी कुछ स्थानों पर आंतरिक मतभेद और पैनल स्तर पर मुकाबले दिखाई दिए।
कामरेज और गांदेवी में भाजपा समर्थित पैनल आगे
कामरेज विभाग सहकारी खांड मंडली उद्योग लिमिटेड में भाजपा समर्थित सहकार पैनल ने 18 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की। परिवर्तन पैनल को दो और निर्दलीय उम्मीदवारों को तीन सीटें मिलीं। पिछले कार्यकाल में सहकार पैनल के खाते में 16 सीटें थीं।
नवसारी की गांदेवी शुगर में भाजपा समर्थित समन्वय पैनल ने 11 सीटें जीतीं, जबकि चार सीटें प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। दोनों पैनलों में बड़ी संख्या में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी ने मुकाबले के आंतरिक स्वरूप को भी सामने रखा।
भरूच में नाम वापसी से बदला मुकाबला
भरूच की पांडवई शुगर कोऑपरेटिव में नामांकन के अंतिम दिन परिवर्तन पैनल के 14 उम्मीदवारों और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने नाम वापस ले लिया। इसके बाद 16 में से केवल दो सीटों पर चुनाव हुआ और भाजपा समर्थित सहकार पैनल का बोर्ड पर प्रभावी नियंत्रण बना रहा।
निर्वाचित लोगों में गुजरात के जल संसाधन एवं जलापूर्ति मंत्री तथा गुजरात राज्य शुगर कोऑपरेटिव फैक्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन ईश्वरसिंह पटेल भी शामिल रहे।
भाजपा ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल
बारडोली और सायन में सामने आए परिणामों के बाद भाजपा ने अन्य सहकारी समितियों में संभावित बगावत को रोकने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 30 अगस्त से पार्टी नेताओं ने बारडोली कार्यालय में सहकार और परिवर्तन पैनल के निर्वाचित सदस्यों से मुलाकात शुरू की, ताकि चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन पदों के लिए समर्थन की स्थिति का आकलन किया जा सके।
मढ़ी शुगर में भी भाजपा के जिला नेताओं की ओर से परिवर्तन खेमे के साथ काम कर रहे पदाधिकारियों से बातचीत किए जाने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य मौजूदा चेयरमैन समीर भक्त के साथ किसी तरह की सहमति बनाने की कोशिश के रूप में बताया गया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी आगामी सहकारी चुनावों के लिए उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर दी है।
गुजरात के सहकारी क्षेत्र में बदलता राजनीतिक समीकरण
हाल के चुनावों ने गुजरात के सहकारी चीनी क्षेत्र में भाजपा समर्थित पैनलों की स्थिति को लेकर नई चर्चा शुरू की है। एक ओर बारडोली और सायन में पार्टी समर्थित पैनलों को नुकसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर भरूच, गांदेवी और कामरेज में भाजपा समर्थित पैनल नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहे हैं।
इसलिए मौजूदा चुनाव परिणामों को पूरे सहकारी क्षेत्र में किसी एकतरफा बदलाव के रूप में देखना उचित नहीं होगा। उपलब्ध नतीजों में जहां कुछ संस्थानों में भाजपा समर्थित पैनलों की स्थिति कमजोर हुई है, वहीं कई समितियों में उनका प्रभाव कायम है। आने वाले सहकारी चुनावों में भाजपा के भीतर संभावित असंतोष को रोकना और विभिन्न गुटों के बीच समन्वय बनाए रखना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक चुनौती के रूप में सामने आया है।







