
देहरादून:-सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली का शिकार प्रस्तावित *”उत्तराखंड भूमि अतिक्रमण(निषेध)अध्यादेश 2026″* को जनहित में आगामी कैबिनेट में लाकर, तत्काल लागू कराने की मांग को लेकर संयुक्त नागरिक संगठन ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव, सचिव आवास, सचिव राजस्व और एम डी डी ए एवं जिलाधिकारी को भी ज्ञापन भेजे ।
संगठन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यसचिव को भी मिला। ये लोग सचिवालय में संबंधित विभागों के कार्यालयों में भी गए।
ज्ञापन में कहा गया है की राज्य में सरकारी/निजी जमीनों को भू माफियाओं के अतिक्रमण/अवैध कब्जों से मुक्त कराने के पुलिस/प्रशासन द्वारा विगत वर्षों में जितने भी प्रयास किए गए वो अधिकांशतया असफल हुए हैं।लेकिन अब पीड़ित लोगों को आशा थी की संदर्भित अध्यादेश लागू होने से भूमाफिया पर लगाम लगेगी और पीड़ितों को राहत मिलेगी।क्योंकि प्रस्तावित कानून में नए पुराने दोनों अवैध कब्जों के आरोपियों कब्जाधारियों के विरुद्ध भारी भरकम जुर्माने समेत दस साल तक की कैद के प्राविधान तथा विशेष न्यायालयों की स्थापना के भी प्राविधान शामिल है। संगठन का कहना है की वर्तमान स्थिति यह है की रोजाना हो रहे भू माफियाओं के काले कारनामों से लगता है जैसे माफियाओं को कोई डर भय नहीं है और शासन प्रशासन इनके सामने असहाय बन गया है और आम जन में चर्चा है की भू माफिया अपने धन बल और राजनैतिक संबंधों के बल पर निरंकुश हो गए हैं।
ज्ञापन में आशंका जाहिर की गई है की संभावित है की माफिया प्रस्तावित अध्यादेश को लागू होने देने में अपने संसाधनों का प्रयोग कर रहे हों। क्योंकि हाल ही में दो- दो कैबिनेट होने के बाद भी इस अध्यादेश को पटल पर लाकर पारित नहीं कराया गया जो अफसोसनाक है। और ये सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह भी है जो इतने गंभीर विषय को प्राथमिकता में नहीं ले पा रही है। ज्ञापन के अंत में अनुरोध किया गया है की कैबिनेट की आगामी बैठक में यथा प्रस्तावित अध्यादेश को लाकर पारित कराया जाय और राज्य को भू माफियाओं से मुक्ति दिलाए।प्रतिनिधिमंडल में गिरीश चंद्र भट्ट, ठाकुर शेरसिंह, उमेश्वर सिंह रावत, सुशील त्यागी, प्रदीप कुकरेती, उमेश सक्सेना आदि शामिल थे।




