
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद तीरथ सिंह रावत करीब दो साल बाद एक बार फिर सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम में तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी दी है। इसके साथ ही उत्तराखंड के चार नेताओं को भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में स्थान मिला है। तीरथ सिंह रावत के साथ गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री महेंद्र पांडे और राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह संयोजक आलोक भट्ट को भी उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव के आधार पर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
तीरथ सिंह रावत की राष्ट्रीय राजनीति में वापसी को उत्तराखंड भाजपा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद से वह किसी बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी में नहीं थे। हालांकि उन्होंने अपना सांसद का कार्यकाल पूरा किया था। अब भाजपा नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर एक बार फिर पार्टी के शीर्ष संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी है।
तीरथ सिंह रावत का राजनीतिक सफर लंबे संगठनात्मक अनुभव से जुड़ा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और बाद में छात्र राजनीति, संगठन, विधानसभा, सांसद और सरकार के शीर्ष पद तक की जिम्मेदारियां संभालीं। संगठन ने समय-समय पर उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी, उन्होंने उसे निभाया। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भले ही करीब पांच महीने का रहा और कई विवादों से घिरा रहा, लेकिन संगठन में उनकी लंबी भूमिका और अनुभव को पार्टी ने हमेशा महत्व दिया।
संघ प्रचारक से मुख्यमंत्री तक का सफर
तीरथ सिंह रावत का जन्म एक अप्रैल 1964 को पौड़ी गढ़वाल के सीरों, पट्टी असवालस्यूं में हुआ था। उनके पिता का नाम कलम सिंह रावत है। वर्ष 1983 से 1988 तक उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में कार्य किया। छात्र राजनीति के दौरान भी वह सक्रिय रहे। गढ़वाल विश्वविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष रहने के साथ उन्होंने छात्र संघ मोर्चा उत्तर प्रदेश में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
इसके बाद तीरथ सिंह रावत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक पदों पर रहे। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उत्तराखंड के संगठन मंत्री और राष्ट्रीय मंत्री रहे। भारतीय जनता युवा मोर्चा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में भी उन्होंने काम किया।
वर्ष 1997 में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए और विधान परिषद में विनिश्चय संकलन समिति के अध्यक्ष बनाए गए। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 में उन्हें नवगठित राज्य के प्रथम शिक्षा मंत्री बनने का अवसर मिला।
भाजपा संगठन में भी निभाई अहम भूमिका
वर्ष 2007 में तीरथ सिंह रावत को भाजपा उत्तराखंड का प्रदेश महामंत्री चुना गया। इसके बाद वर्ष 2012 से 2017 के बीच उन्होंने चौबट्टाखाल विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2013 में उन्हें उत्तराखंड भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
संगठन में उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारियां दीं। वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव पद पर रहे और राष्ट्रीय संगठन में काम करने का अनुभव हासिल किया। वर्ष 2019 में पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा सांसद निर्वाचित होने के साथ उन्होंने हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाली।
मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली
त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद भाजपा नेतृत्व ने वर्ष 2021 में तीरथ सिंह रावत को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। हालांकि उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल करीब पांच महीने ही रहा और विभिन्न राजनीतिक व प्रशासनिक विवादों के बीच उन्हें पद से हटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सांसद के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद से वह सक्रिय राजनीति में अपेक्षाकृत कम नजर आए। अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में उनकी वापसी से उनके राजनीतिक अनुभव का उपयोग भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में किए जाने की संभावना है।
उत्तराखंड के चार नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तराखंड से चार नेताओं को जिम्मेदारी मिली है। तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी को एक बार फिर राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। बलूनी को मीडिया और संगठन के क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण पार्टी नेतृत्व का भरोसा हासिल है।
इसी तरह आलोक भट्ट को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह संयोजक बनाया गया है। वह हिमाचल प्रदेश में लंबे समय तक भाजपा के महामंत्री संगठन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। महेंद्र पांडे का भी संगठन में लंबा अनुभव रहा है और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है।
तीरथ बोले- जहां भी जिम्मेदारी मिलेगी, बखूबी निभाऊंगा
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद तीरथ सिंह रावत ने भाजपा नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उस जिम्मेदारी पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने पार्टी की रीति-नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि देश 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है और पार्टी कार्यकर्ता पूरी तरह समर्पित होकर काम कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2027 की राजनीतिक चुनौती को स्वीकार करते हुए जीत के लिए काम करने की बात भी कही।
तीरथ सिंह रावत की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति को उनके लंबे राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। संघ प्रचारक से लेकर मुख्यमंत्री और सांसद तक विभिन्न भूमिकाएं निभा चुके तीरथ अब भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में नई जिम्मेदारी के साथ सक्रिय होंगे।




