
नैनीताल: ऊधमसिंह नगर जिले के सितारगंज तहसील परिसर में विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई के बाद शुरू हुआ विवाद बुधवार रात से गुरुवार तक लगातार जारी रहा। कर्मचारी संगठनों के विरोध के चलते विजिलेंस टीम पूरी रात तहसील परिसर के भीतर ही रुकी रही। देर रात तक कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। वरिष्ठ अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण बनी रही। वहीं, इस घटनाक्रम के विरोध में राजस्व कर्मचारी संगठनों ने प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया है, जिससे तहसीलों में राजस्व संबंधी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई के बाद तहसील परिसर में कर्मचारियों का विरोध शुरू हो गया। विरोध के कारण विजिलेंस टीम रातभर परिसर के भीतर ही रही। देर रात तक विजिलेंस अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच कई चरणों में बातचीत हुई, लेकिन किसी भी बिंदु पर सहमति नहीं बन सकी। कर्मचारी संगठनों का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच के बिना कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी, जबकि विजिलेंस टीम अपनी कानूनी प्रक्रिया पर कायम रही।
रात के दौरान यह उम्मीद जताई जा रही थी कि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर मध्यस्थता करेंगे और गतिरोध समाप्त कराने का प्रयास करेंगे। हालांकि देर रात तक जिले का कोई वरिष्ठ अधिकारी तहसील परिसर नहीं पहुंचा। इससे कर्मचारियों और विजिलेंस टीम के बीच बनी तनातनी पूरी रात जारी रही और माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
इस बीच ट्रैप कार्रवाई में गिरफ्तार वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा के परिजन भी देर रात तहसील परिसर पहुंचे। घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व विधायक प्रेम सिंह राणा ने भी संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया। हालांकि इससे भी गतिरोध समाप्त नहीं हो सका।
विजिलेंस की कार्रवाई के विरोध में राजस्व कर्मचारी संयुक्त परिषद सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। संगठनों का कहना है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जा सके।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि राजस्व वसूली की नियमित और वैधानिक प्रक्रिया को रिश्वतखोरी का मामला बताकर कर्मचारियों की छवि धूमिल की जा रही है। उनका कहना है कि बिना सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच किए कार्रवाई किए जाने से कर्मचारियों में गहरा असंतोष और रोष व्याप्त है। उनका दावा है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच के बाद ही किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
घटनाक्रम के विरोध में राजस्व कर्मियों ने प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
राजस्व कर्मियों के कार्य बहिष्कार का असर प्रदेश की तहसीलों में दिखाई देने की संभावना है। नामांतरण, आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र जारी करने, भू-अभिलेख संबंधी कार्य, राजस्व वसूली तथा अन्य तहसीली सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे आम नागरिकों को आवश्यक राजस्व सेवाएं प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच गतिरोध समाप्त कराने के प्रयास जारी हैं, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया।




