पिथौरागढ ( उत्तराखण्ड) लोक विरासत जनजातीय एवं लोक कला समिति’ द्वारा आज राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (जी.जी.एच.एस.एस.) बजेटी में एक दिवसीय विशेष निःशुल्क लोक वाद्य यंत्र कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बड़े उत्साह के साथ भाग लेकर उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, जैसे हुड़का और डोर-थाली को बजाने की बारीकियों को समझा और इनके साथ गाए जाने वाले गीतों के विशेष गुर सीखे। इस अवसर पर युवाओं को प्रेरित करते हुए समिति के संस्थापक पीयूष धामी ने कहा कि युवा चाहे जितनी भी पाश्चात्य संस्कृति को अपना लें, अंत में उन्हें अपनी मूल संस्कृति की ओर ही वापस आना होगा क्योंकि ये पारंपरिक लोक वाद्य ही हमारी असली पहचान हैं, इसलिए हमें अपनी इस अनमोल विरासत का संरक्षण और संवर्धन करना चाहिए। गौरतलब है कि पीयूष धामी मात्र 18 वर्ष की आयु से ही इस समिति का गठन कर और इसका कुशल नेतृत्व संभालकर युवाओं को अपनी भूली-बिसरी संस्कृति से जोड़ने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। इस गरिमामयी कार्यक्रम में स्मृति भट्ट, प्रियंशु राज, कविता पंत सहित कई अन्य प्रबुद्ध लोग और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।




