
देहरादून। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) द्वारा धामों की धारण क्षमता को लेकर किए गए विस्तृत अध्ययन में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब में पहली बार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है। यह संकेत है कि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों का आकर्षण देश ही नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के नए श्रद्धालुओं के बीच भी तेजी से बढ़ रहा है।
वर्ष 2025 के दौरान किए गए इस अध्ययन में धामों में आने वाले यात्रियों की संख्या, उनकी यात्रा की आदतों, परिवहन के साधनों, ठहरने की व्यवस्था और सुविधाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि चारधाम यात्रा अब केवल पारंपरिक श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़ी संख्या में नए यात्री भी इन धार्मिक स्थलों तक पहुंच रहे हैं।
केदारनाथ और गंगोत्री में सबसे अधिक नए श्रद्धालु
अध्ययन के अनुसार केदारनाथ धाम में लगभग 79 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पहली बार दर्शन के लिए पहुंचे हैं। वहीं गंगोत्री धाम में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत दर्ज किया गया। यमुनोत्री धाम में करीब 70 प्रतिशत श्रद्धालु पहली बार पहुंचे, जबकि हेमकुंड साहिब में सबसे अधिक 89 प्रतिशत यात्रियों ने पहली बार यात्रा करने की जानकारी दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क, डिजिटल प्रचार, ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के कारण नए यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सोशल मीडिया और यात्रा अनुभवों के व्यापक प्रचार ने भी युवाओं और नए श्रद्धालुओं को आकर्षित किया है।
निजी टैक्सी और बस बनी प्रमुख यात्रा साधन
रिपोर्ट में यात्रा के दौरान उपयोग किए गए परिवहन साधनों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है। केदारनाथ धाम पहुंचने वाले लगभग 41 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने निजी टैक्सी या बस का उपयोग किया। इसके बाद 34 प्रतिशत यात्रियों ने सार्वजनिक परिवहन का सहारा लिया। करीब 15 प्रतिशत श्रद्धालु निजी कारों से पहुंचे, जबकि छह प्रतिशत लोगों ने दोपहिया वाहनों का उपयोग किया।
गंगोत्री धाम में निजी टैक्सी और बस का उपयोग सबसे अधिक देखने को मिला। यहां 61 प्रतिशत श्रद्धालु टैक्सी या बस से पहुंचे। लगभग 19 प्रतिशत यात्रियों ने निजी कारों का उपयोग किया और नौ प्रतिशत दोपहिया वाहनों से पहुंचे।
हेमकुंड साहिब में सार्वजनिक परिवहन की लोकप्रियता
हेमकुंड साहिब की यात्रा करने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं ने सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी। इसके बाद निजी टैक्सी और निजी कारों का स्थान रहा। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 12 प्रतिशत श्रद्धालु दोपहिया वाहनों से भी यहां पहुंचे। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित सड़क सुविधाओं के बावजूद यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
यमुनोत्री धाम में सार्वजनिक परिवहन और निजी टैक्सी का उपयोग लगभग समान स्तर पर पाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों माध्यम यात्रियों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।
हेलिकॉप्टर सेवाओं का भी बढ़ रहा उपयोग
चारधाम यात्रा में हेलिकॉप्टर सेवाओं की लोकप्रियता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। अध्ययन में बताया गया कि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में लगभग सात प्रतिशत श्रद्धालुओं ने हेलिकॉप्टर सेवा का उपयोग किया। वहीं गंगोत्री और यमुनोत्री में यह आंकड़ा करीब तीन प्रतिशत रहा।
विशेष रूप से बुजुर्ग, दिव्यांग और समय की कमी से जूझ रहे श्रद्धालु हेलिकॉप्टर सेवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे यात्रा का स्वरूप भी धीरे-धीरे बदलता दिखाई दे रहा है।
होटल और होमस्टे श्रद्धालुओं की पहली पसंद
अध्ययन में यात्रियों की ठहरने संबंधी प्राथमिकताओं का भी विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश श्रद्धालुओं ने होटल और होमस्टे में ठहरना पसंद किया। बेहतर सुविधाएं, स्वच्छता और स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव के कारण होमस्टे का आकर्षण बढ़ा है।
यमुनोत्री धाम में लगभग 10 प्रतिशत श्रद्धालु धर्मशालाओं में ठहरे, जो अन्य धामों की तुलना में सबसे अधिक है। वहीं केदारनाथ धाम में करीब 18 प्रतिशत यात्रियों ने टेंट और कैंप में ठहरने को प्राथमिकता दी। साहसिक अनुभव और सीमित आवासीय सुविधाओं के कारण यहां कैंप संस्कृति तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
धार्मिक पर्यटन के विस्तार का संकेत
रिपोर्ट के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में नए श्रद्धालु चारधाम यात्रा से जुड़ रहे हैं। यह राज्य में धार्मिक पर्यटन के विस्तार, आधारभूत सुविधाओं में सुधार और तीर्थाटन के प्रति बढ़ती रुचि का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आवास, परिवहन, स्वच्छता, पार्किंग और आपदा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी, ताकि भविष्य में भी यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।




