
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के रीवैल्यूएशन पोर्टल पर कथित साइबर हमले और पेमेंट सिस्टम में अनधिकृत हस्तक्षेप का मामला सामने आने के बाद शिक्षा जगत में चिंता बढ़ गई है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर रहे छात्रों को उस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब पोर्टल पर शुल्क राशि में असामान्य बदलाव दिखाई देने लगे। कई छात्रों के लिए निर्धारित फीस अचानक एक रुपये से लेकर 67 हजार से 68 हजार रुपये तक प्रदर्शित होने लगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह समस्या CBSE के ऑनलाइन रीवैल्यूएशन पोर्टल और उससे जुड़े पेमेंट गेटवे सिस्टम में हुई अनधिकृत घुसपैठ के कारण सामने आई। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि लगभग 50 से अधिक छात्रों ने किसी तरह सिस्टम तक पहुंच बनाकर भुगतान प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। हालांकि यह अभी जांच का विषय है कि यह कार्य शरारतवश किया गया या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य था।
सूत्रों का कहना है कि पोर्टल लाइव होने के दौरान भुगतान संबंधी मॉड्यूल में तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाया गया। इसके परिणामस्वरूप फीस राशि में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने लगे, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और चिंता का माहौल बन गया। कई विद्यार्थियों ने शिकायत की कि निर्धारित शुल्क की जगह पोर्टल पर बेहद कम या अत्यधिक अधिक राशि दिखाई दे रही थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CBSE और शिक्षा मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। जांच में यह सामने आया कि समस्या HDFC बैंक के पेमेंट गेटवे से जुड़े इंटीग्रेशन में उत्पन्न हुई थी। इसके बाद भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए गए।
शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर चार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक—भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र—को भी वैकल्पिक पेमेंट गेटवे के रूप में जोड़ा गया है। इन बैंकों के माध्यम से भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की योजना बनाई गई है।
घटना की तकनीकी जांच के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। IIT मद्रास, IIT कानपुर तथा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की संयुक्त टीम पोर्टल के कोड, सुरक्षा संरचना और पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन की विस्तृत जांच कर रही है। विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि सिस्टम में किस प्रकार की कमजोरी का लाभ उठाया गया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञ टीम पोर्टल की सुरक्षा परतों को मजबूत करने, भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने और संभावित साइबर खतरों को रोकने के लिए व्यापक तकनीकी सुधारों पर काम कर रही है। हाल ही में किए गए परीक्षणों में नई व्यवस्था संतोषजनक पाई गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित होगा।
उल्लेखनीय है कि 24 मई को CBSE परिणामों के बाद छात्रों को आ रही तकनीकी और भुगतान संबंधी समस्याओं को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman के साथ भी चर्चा हुई थी। इसके बाद भुगतान अवसंरचना को मजबूत करने और विभिन्न बैंकिंग प्लेटफॉर्म्स के बेहतर समन्वय का निर्णय लिया गया। अब शिक्षा मंत्रालय और CBSE पूरे मामले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं ताकि विद्यार्थियों को पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।






