
देहरादून। डीएवी (पीजी) कॉलेज, देहरादून के विधि विभाग द्वारा सहस्त्रधारा रोड स्थित अपोलो इंटरनेशनल स्कूल के सभागार में आयोजित एक दिवसीय विधिक जागरूकता एवं विधिक सेवा शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विधि के विद्यार्थियों को कानून की बारीकियों, नागरिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता और सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक किया गया। शिविर में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि डीएवी (पीजी) कॉलेज रोवर्स-रेंजर्स के पूर्व निदेशक, पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष एवं मुख्य सलाहकार डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है—“इग्नोरेंस ऑफ लॉ इज नो एक्सक्यूज़” अर्थात कानून की जानकारी न होना किसी भी अपराध के लिए बहाना नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि न्यायालय साक्ष्यों और नियमों के आधार पर निर्णय देता है, न कि किसी व्यक्ति की अनभिज्ञता या भावनाओं के आधार पर। डॉ. वर्मा ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग अपने कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों से अनभिज्ञ हैं। इसी कारण वे कई बार अनजाने में कानूनी विवादों में फंस जाते हैं या अपने अधिकारों का लाभ नहीं उठा पाते। उन्होंने विधि के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल वकालत या न्यायिक सेवा तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के कमजोर, वंचित और ग्रामीण वर्गों को कानूनी रूप से जागरूक करने में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। विधि के छात्रों को चाहिए कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों, सरकारी योजनाओं और न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दें। विशिष्ट अतिथि अपोलो इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन मोहित बंसल ने कहा कि भारत में आम लोगों को कानूनी अधिकारों और दायित्वों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। ऐसे शिविर समाज में विधिक चेतना बढ़ाने और लोगों को जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीएवी कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) कौशल कुमार ने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि निर्धन व्यक्तियों, महिलाओं, बच्चों तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता और परामर्श उपलब्ध कराने की व्यवस्था कानून में है। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में उत्कृष्ट अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा दी।

विधि विभागाध्यक्ष डॉ. पारुल दीक्षित ने एलएलबी की पढ़ाई के बाद उपलब्ध रोजगार अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीते दस वर्षों में डीएवी कॉलेज के 25 विद्यार्थियों का न्यायिक सेवा में चयन होना विभाग की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि विधि विभाग शिक्षा, समाज और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित होकर कार्य करता रहेगा। शिविर के दौरान विधि विभाग के प्रवक्ता डॉ. विवेक त्यागी के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विधिक विषयों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। अर्निमा कौशिक ने दिव्यांगजनों के अधिकार, आयुष्मान घिल्डियाल ने आपदा प्रबंधन, तानिया वर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, शगुन धीमान ने महिलाओं की सुरक्षा, हरप्रीत कौर ने पशु संरक्षण, आशीष वर्मा ने निःशुल्क कानूनी सहायता और प्रशांत चौहान ने लैंगिक अपराध एवं बाल संरक्षण विषय पर विचार रखे।
इसके अलावा बलविंदर सिंह ने कृषि भूमि कानून, कमलदीप माहरा ने भ्रष्टाचार निवारण कानून, वंदना दिवाकर ने दहेज प्रथा, रूपा यादव ने हिंदू विवाह एवं संपत्ति अधिकार, अक्षिता राणा ने भरण-पोषण कानून, भावना थापा ने बाल कल्याण योजनाएं, रितेश भंडारी ने उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, नेहा चौहान एवं शिवानी ने मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर कानून तथा आकांक्षा साजवान और आराधना गोदियाल ने महिलाओं एवं वन कानूनों पर विस्तार से जानकारी दी। विद्यार्थियों ने संबंधित विभागों के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी साझा की।
कार्यक्रम को विधि विभाग के प्रवक्ताओं डॉ. जे.एस. चांदपुरी, डॉ. अपूर्व मावई, डॉ. हरप्रीत कौर और डॉ. प्रतिमा सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर डॉ. एस.वी. त्यागी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. आर.के. शर्मा, डॉ. विनीत विश्नोई, डी.एस. त्रिपाठी, अनिल श्रीवास्तव, कपिल मिश्रा, नीरज आशीष, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष शुभम सेमल्टी सहित लगभग 300 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन छात्रा अर्णिमा कौशिक और कमलप्रीत ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. राजेश कुमार दुबे ने प्रस्तुत किया। शिविर के सफल आयोजन को विधिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया।




