
देहरादून: 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ ही इस परियोजना की कई विशेषताएं चर्चा में हैं, लेकिन सबसे अधिक ध्यान वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बनाए गए अंडरपास ने आकर्षित किया है। यह अंडरपास न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में भी उभरकर सामने आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुभारंभ किए गए इस इकोनॉमिक कॉरिडोर में विकास और जैव विविधता के संतुलन को प्राथमिकता दी गई है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां 70 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वन भूमि है, वहां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के दौरान वन्यजीवों के आवागमन को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे में करीब 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव-अनुकूल अंडरपास तैयार किया गया है।
इस अंडरपास के निर्माण से जंगलों में रहने वाले जानवरों के प्राकृतिक मार्ग बाधित नहीं हुए हैं। इससे उन्हें सड़क पार करने के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा और उनका आवागमन सुरक्षित बना रहेगा। यही कारण है कि इस परियोजना को पर्यावरण और विकास के संतुलित दृष्टिकोण का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
परियोजना की अन्य प्रमुख खूबियों में 93 अंडरपास, 9 बड़े पुल और 43 छोटे पुलों का निर्माण शामिल है। इसके अलावा 10 विशेष वन्यजीव अंडरपास भी बनाए गए हैं, जो अलग-अलग प्रजातियों के जानवरों के लिए उपयोगी होंगे।
वन संरक्षण को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य में पेड़ों की कटाई भी न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया। जहां पहले अनुमान था कि लगभग 45 हजार पेड़ों की कटाई होगी, वहीं योजना में बदलाव कर इसे घटाकर करीब 11,160 पेड़ों तक सीमित कर दिया गया। एलिवेटेड सड़क को नदी के तल के बीच से निकालने की रणनीति ने इसमें अहम भूमिका निभाई।
भविष्य की योजनाओं के तहत इस एक्सप्रेसवे को गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए शामली तक नया प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है, जिससे पूर्वांचल के क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही, हरिद्वार को जोड़ने के लिए सहारनपुर बाईपास के पास करीब 50 किलोमीटर लंबा स्पर मार्ग भी बनाया जा रहा है, जिसका अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है।
कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे केवल तेज रफ्तार यात्रा का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह परियोजना यह भी दिखाती है कि आधुनिक विकास योजनाएं पर्यावरण संरक्षण के साथ भी सफलतापूर्वक लागू की जा सकती हैं।




