
देहरादून: Rajaji Tiger Reserve में गुलदारों (तेंदुओं) की बढ़ती संख्या ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रिजर्व के केवल पश्चिमी हिस्से में ही 200 से अधिक गुलदार मौजूद हैं। यह आंकड़ा पूर्व में जारी रिपोर्ट्स की तुलना में काफी अधिक है, जिससे इस क्षेत्र में वन्यजीव संतुलन को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्यरत एक गैर सरकारी संस्था ने वर्ष 2025 में यह अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि राजाजी के पश्चिमी क्षेत्र में गुलदारों का घनत्व अपेक्षा से कहीं अधिक है। इससे पहले National Tiger Conservation Authority (एनटीसीए) की 2020 की रिपोर्ट में पूरे राजाजी टाइगर रिजर्व में 171 गुलदारों का उल्लेख किया गया था। ऐसे में केवल एक हिस्से में 200 से अधिक गुलदारों की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस असंतुलन का मुख्य कारण पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की अपेक्षाकृत कम संख्या है। जहां पूर्वी हिस्से में बाघों की अच्छी उपस्थिति है, वहीं पश्चिमी हिस्से में बाघों की कमी के चलते गुलदारों को फैलने का अधिक अवसर मिला। इसके अलावा इस क्षेत्र में हिरन जैसे शिकार की पर्याप्त उपलब्धता और अनुकूल वास स्थल भी तेंदुओं की संख्या बढ़ने के पीछे अहम कारण बताए जा रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में गुलदारों की बढ़ती मौजूदगी महसूस की जा रही थी, जिसके चलते इस अध्ययन को कराया गया। अब इस डेटा के आधार पर वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण की रणनीतियों को और मजबूत किया जाएगा।
अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) विवेक पांडे के अनुसार, फिलहाल यह अध्ययन केवल पश्चिमी हिस्से तक सीमित है। जल्द ही पूर्वी क्षेत्र में भी इसी तरह का सर्वे कराया जाएगा, जिससे पूरे राजाजी टाइगर रिजर्व में गुलदारों और अन्य वन्यजीवों की वास्तविक संख्या का सटीक आकलन किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुलदारों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है। ऐसे में समय रहते संतुलित प्रबंधन और निगरानी बेहद आवश्यक होगी, ताकि वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों को संतुलित रखा जा सके।




