
देहरादून। प्रदेश में बेरोजगारी और रोजगार की वास्तविक स्थिति जानने के लिए केंद्र सरकार की ओर से पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) शुरू किया जा रहा है। यह आवधिक श्रम बल सर्वे फरवरी से दिसंबर 2026 तक प्रदेशभर में संचालित होगा। इसके माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि कितने लोग रोजगार में हैं, कितने काम की तलाश में हैं और श्रम बाजार में वास्तविक भागीदारी का स्तर क्या है।
सर्वे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में किया जाएगा। जनपद स्तर पर कुल 28 इकाइयों का चयन किया गया है, जिनमें 16 ग्रामीण और 12 शहरी इकाइयां शामिल हैं। विभागीय कर्मचारी चयनित क्षेत्रों में घर-घर जाकर परिवार के मुखिया और अन्य सदस्यों से संबंधित जानकारी ऑनलाइन दर्ज करेंगे।
सर्वे के तहत शिक्षा, रोजगार की स्थिति, बेरोजगारी, मासिक पारिवारिक व्यय, पिछले 365 दिनों में किए गए कार्य, एक महीने और एक सप्ताह में कार्य किए गए दिनों व घंटों की जानकारी जुटाई जाएगी। निर्धारित मानकों के अनुसार 15 से 59 वर्ष आयु वर्ग के स्वस्थ और कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों को श्रम बल का हिस्सा माना जाएगा। यहां तक कि यदि किसी व्यक्ति ने एक घंटे भी आर्थिक गतिविधि में कार्य किया है, तो उसे रोजगार की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
इस राष्ट्रीय स्तर के सर्वे का उद्देश्य श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर), वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (डब्ल्यूपीआर), बेरोजगारी दर और करेंट वीकली स्टेटस (सीडब्ल्यूएस) जैसे प्रमुख संकेतकों के माध्यम से रोजगार की सटीक तस्वीर तैयार करना है।
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने ने बताया कि सर्वे 11 फरवरी से शुरू होगा और सभी कार्य कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग (CAPI) प्रणाली से किए जाएंगे। सर्वे के निष्कर्ष पहले राज्य सरकार और फिर केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य की रोजगार योजनाओं और आर्थिक नीतियों की दिशा तय की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएलएफएस के आंकड़े न केवल बेरोजगारी दर की सटीक जानकारी देंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि प्रदेश में श्रम शक्ति का वास्तविक उपयोग कितना हो रहा है और किन क्षेत्रों में रोजगार सृजन की सबसे अधिक आवश्यकता है।




