
आगरा के थाना लोहामंडी क्षेत्र में सराफा कारोबार से जुड़े लेनदेन को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। बकाया रकम की मांग करना एक सराफा कारोबारी को भारी पड़ गया। पीड़ित कारोबारी ने न सिर्फ मारपीट बल्कि जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का भी आरोप लगाया है। मामले में पुलिस द्वारा पहले कार्रवाई न किए जाने पर न्यायालय की शरण ली गई, जिसके बाद अदालत के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पूरा मामला क्या है?
जीवनी मंडी निवासी आशीष कुमार ने बताया कि वे अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं और किनारी बाजार में ‘बाल किशन इंडस्ट्रीज’ नाम से सोने-चांदी का कारोबार करते हैं। उनका कहना है कि आवास विकास कॉलोनी निवासी रोहित कुमार झा भी किनारी बाजार में सराफा व्यापार से जुड़े हुए हैं।
आशीष कुमार के अनुसार, आभूषणों की खरीद के लिए अलग-अलग तिथियों में उन्होंने आरटीजीएस के माध्यम से कुल 10.35 करोड़ रुपये का भुगतान रोहित कुमार झा को किया। इसके एवज में उन्हें 10 करोड़ 22 लाख 55 हजार 998 रुपये मूल्य का माल प्राप्त हुआ, लेकिन इसके बावजूद 12.44 लाख रुपये का माल अभी तक नहीं दिया गया।
बकाया मांगने पर हुआ विवाद
पीड़ित का आरोप है कि कई बार मौखिक रूप से बकाया माल भेजने का अनुरोध करने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ। अंततः 21 दिसंबर 2025 को जब उन्होंने लोहामंडी क्षेत्र में शेष राशि का माल मांगा, तो रोहित कुमार झा, उनके भाई मोहित, कर्मचारी जगन चौधरी और कुछ अन्य अज्ञात लोगों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की।
इतना ही नहीं, आरोप है कि इस दौरान आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग भी किया, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।
पुलिस से न्यायालय तक मामला
घटना के बाद आशीष कुमार ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस द्वारा तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए।
पुलिस का पक्ष
इस संबंध में इंस्पेक्टर लोहामंडी ने बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
व्यापारिक लेनदेन बना आपराधिक मामला
यह मामला दर्शाता है कि व्यापारिक लेनदेन में पारदर्शिता और समय पर निपटान न होने पर विवाद किस तरह आपराधिक रूप ले सकता है। वहीं, जातिगत टिप्पणी और मारपीट के आरोप मामले को और गंभीर बना देते हैं। फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।





