
देहरादून। उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षक भर्ती का इतिहास शायद ही कभी कानूनी अड़चनों से मुक्त रहा हो। एक बार फिर राज्य में 1670 पदों पर चल रही प्राथमिक शिक्षक भर्ती न्यायिक दांव-पेंच में उलझ गई है। इस भर्ती से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
राज्य के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कुल 1670 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसके लिए 61,861 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। वर्तमान नियमों के अनुसार इस भर्ती में केवल द्विवर्षीय डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) अभ्यर्थी ही पात्र हैं। हालांकि, बीएड करने के बाद छह माह का ब्रिज कोर्स पूरा कर चुके प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने खुद को डीएलएड के समकक्ष मानते हुए भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए जाने की मांग उठाई है।
इसी मांग को लेकर ममता पाल व अन्य अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इससे पहले अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से याचिका खारिज हो गई। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है।
शिक्षा विभाग के सामने इस प्रकरण में स्थिति जटिल बनी हुई है। एक ओर राज्य में कार्यरत कई अप्रशिक्षित शिक्षकों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआईओएस) से डीएलएड प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कक्षा एक से पांच तक पढ़ाने की वैधता दी गई है। वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के 11 अगस्त 2023 के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बीएड अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे में ब्रिज कोर्स कर चुके बीएड अभ्यर्थियों को लेकर कानूनी स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।
इस विवाद का असर उन डीएलएड अभ्यर्थियों पर भी पड़ रहा है, जो लंबे समय से भर्ती पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। डीएलएड अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में जितनी अधिक देरी होगी, उतना ही मामला और अधिक कानूनी उलझनों में फंसता चला जाएगा। वे चाहते हैं कि 1670 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी और विलंब के पूरा किया जाए।
फिलहाल विभाग ने 12 जनवरी को सभी जिलों में एक साथ काउंसलिंग कराने की तैयारी की है, ताकि एक अभ्यर्थी को एक से अधिक जिलों में चयन का अवसर न मिले। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के चलते इस प्रक्रिया पर भी संशय बना हुआ है।
इधर, शिक्षक भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद शिक्षा निदेशालय ने शासन को पत्र लिखकर प्रकरण की प्रभावी पैरवी के लिए एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड नामित करने का अनुरोध किया है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं, जिसके फैसले से तय होगा कि 1670 पदों पर चल रही शिक्षक भर्ती आगे बढ़ेगी या फिर एक बार फिर लंबी कानूनी लड़ाई में उलझेगी।




