
सारण| सीवान जिले के टारी बाजार में 27 नवंबर को हुए लगभग 30 लाख रुपये के स्वर्ण आभूषण लूट कांड को लेकर स्थानीय व्यापारियों में गहरा आक्रोश उभर आया है। दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद पुलिस की कार्रवाई न सिर्फ अधूरी मानी जा रही है, बल्कि बरामदगी को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का दावा है कि कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे लगभग ढाई लाख रुपये मूल्य के आभूषण बरामद किए गए हैं, लेकिन कारोबारियों का कहना है कि यह राशि वास्तविक लूट के मुकाबले बेहद कम है। उनका आरोप है कि पुलिस केवल खानापूर्ति कर रही है और मुख्य आरोपी अभी तक गिरफ्त से बाहर हैं, जिससे जांच पर संदेह गहराता जा रहा है।
व्यवसायियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि चोरी गए स्वर्ण आभूषणों की कीमत करीब 30 लाख रुपये थी, लेकिन पुलिस द्वारा बरामद बताए गए गहनों में न केवल कम मात्रा है, बल्कि उनकी वास्तविकता और घटना से संबंध पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी असंतोष और अविश्वास के चलते टारी बाजार के सभी व्यापारियों ने एकजुट होकर अपनी दुकानें बंद कर दीं और विरोध स्वरूप माझी–गुठनी राज्य मार्ग के नेवारी मोड़ पर सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा और आम लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी।
स्थिति बिगड़ते देख रघुनाथपुर थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और व्यापारियों से वार्ता की कोशिश की। लंबे संवाद के बाद पुलिस अधिकारियों ने व्यापारियों को लिखित आश्वासन दिया कि लूट की शेष संपत्ति जल्द बरामद की जाएगी और सभी फरार अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच लगातार जारी है और विभिन्न पुलिस टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय रूप से लगाया गया है, ताकि पूरे मामले का जल्द खुलासा किया जा सके।
हालांकि लिखित आश्वासन मिलने के बाद सड़क जाम हटाया गया, लेकिन व्यापारियों के मन से असुरक्षा और अविश्वास हट नहीं पाया है। घटना के बाद टारी बाजार ही नहीं, बल्कि आसपास के व्यवसायिक इलाकों में भी भय और चिंता का माहौल फैल गया है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों के बीच व्यापारिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पूर्ण बरामदगी और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।
यह लूट कांड न केवल क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों की उस असुरक्षा को भी उजागर करता है जो बार-बार होने वाली आपराधिक घटनाओं के कारण बढ़ती जा रही है। पुलिस के लिए यह चुनौतीपूर्ण परीक्षा है कि वह न केवल अपराधियों को गिरफ्तार करे, बल्कि व्यापारियों का भरोसा भी बहाल करे, जो इस घटना के बाद बुरी तरह टूट गया है।





