देहरादून: गुरु नानक कॉलेज और बीएफआईटी में गणेश चतुर्थी का पर्व इस वर्ष भी परंपरा, भक्ति और अपार उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर दोनों परिसरों में भगवान श्री गणेश जी का भव्य स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चारण के साथ किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव से सराबोर हो उठा। कार्यक्रम का आरंभ बीएफआईटी परिसर में हुआ, जहां विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर पूरे श्रद्धा भाव से गणपति बप्पा का स्वागत किया। इसके पश्चात गुरु नानक कॉलेज परिसर में विधि-विधान से गणेश स्थापना की गई, जिसने पूरे वातावरण को दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
पूरे आयोजन स्थल को पारंपरिक रंगोलियों, पुष्प सज्जा और भक्ति संगीत से सजाया गया था। मंत्रोच्चारण, धूप-दीप और आरती की गूंज ने सभी के मन को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों ने अत्यंत आकर्षक और भावपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं – जिनमें शास्त्रीय नृत्य, भजन, समूह गीत एवं नाटक शामिल रहे। ये प्रस्तुतियाँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का जीवंत चित्रण भी थीं।
संस्थान के विभिन्न पदाधिकारियों ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए और इस आयोजन के महत्व को रेखांकित किया। गुरु नानक कॉलेज और बीएफआईटी के सीईओ श्री भूपिंदर सिंह ने कहा, “गणेश चतुर्थी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारे विद्यार्थियों और स्टाफ को एकजुट करने वाला आयोजन है, जो हमें भारतीय संस्कृति से गहराई से जोड़ता है। यह उत्सव संस्था की उस सोच को दर्शाता है, जहां शिक्षा और संस्कृति का समन्वय सर्वोपरि है।”
सीओओ श्रीमती विनीत अरोड़ा ने अपने संदेश में कहा, “यह देखकर अत्यंत गर्व होता है कि हमारे विद्यार्थी न केवल शिक्षा में बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। ऐसे आयोजनों से उनमें नेतृत्व, सहयोग और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है।”
सीएसओ श्री सैथजीत सिंह ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “गणेश उत्सव जैसे कार्यक्रम छात्रों में आंतरिक अनुशासन और सामूहिक चेतना को जागृत करते हैं। यह परंपरा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी है।”
रजिस्ट्रार डॉ. ललित कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा, “हमारे संस्थान में इस प्रकार के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों को संतुलित एवं मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं।”
वहीं निदेशक डॉ. एस. दुरैवेल ने कहा, “गणेश चतुर्थी जैसे आयोजनों से हम विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ नैतिकता और संस्कृति से भी जोड़ते हैं। यह आयोजन हमारी साझा विरासत का उत्सव है, जिसमें सबकी सहभागिता प्रेरणास्पद रही।”
गणेश चतुर्थी का यह पावन अवसर दोनों परिसरों में न केवल भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि यह संस्था की उस सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है जो शिक्षा के साथ-साथ मूल्यों, परंपराओं और संगठनात्मक एकता को समान रूप से महत्व देती है। आयोजन में संस्थान के सभी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय एवं सफल बना दिया। बीएफआईटी और गुरु नानक कॉलेज ने यह सिद्ध कर दिया कि जब शिक्षा में संस्कृति और श्रद्धा का समावेश होता है, तब समग्र विकास की नींव और भी मजबूत होती है।