
देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर जोरदार बहस के बीच राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संबोधन के दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा किया, जिससे सदन का माहौल गरमा गया।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जोरदार समर्थन किया और विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध कर देश की आधी आबादी के साथ अन्याय किया गया। उन्होंने कहा कि यदि यह बिल पारित हो जाता तो महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिल पाता।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव का नाम लेते हुए महाभारत का संदर्भ दिया और विपक्ष की तुलना कौरवों से कर दी। इस टिप्पणी के बाद विपक्षी सदस्यों ने कड़ा विरोध जताते हुए सदन में हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि मुख्यमंत्री सदन में गलत तथ्य प्रस्तुत कर रहे हैं और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के जरिए मुद्दे को भटका रहे हैं।
सीएम धामी ने अपने भाषण में कहा कि भारत के इतिहास में नारी शक्ति के कई प्रेरणादायक उदाहरण रहे हैं, जैसे रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और कल्पना चावला। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना समय की मांग है।
उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना, मुद्रा योजना और लखपति दीदी योजना के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने चारधाम यात्रा को प्रदेश की जीवनरेखा बताते हुए इसके महत्व को भी रेखांकित किया।
विपक्ष ने इस दौरान सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई और महिला सुरक्षा, अधिकार तथा आरक्षण के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का कहना था कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति कर रही है और जमीनी स्तर पर महिलाओं की स्थिति सुधारने में विफल रही है।
विशेष सत्र के दौरान लगातार नारेबाजी और विरोध के चलते कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई। एक दिन के इस सत्र में महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर चर्चा के साथ-साथ राजनीतिक टकराव भी खुलकर सामने आया, जिससे साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रूप ले सकता है।




