
देहरादून। राज्य सरकार प्रदेश की बुजुर्ग महिलाओं के जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की पहल पर एक नई समग्र सहायता योजना का मसौदा तैयार किया जा रहा है, जिसे आगामी वित्तीय वर्ष से लागू किए जाने की संभावना है।
विभाग की ओर से राज्यभर में व्यापक सर्वे और संवाद कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें विभिन्न जिलों की बुजुर्ग महिलाओं से सीधे बातचीत कर उनकी वास्तविक जरूरतों और समस्याओं को समझा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पारिवारिक सहयोग जैसे पहलुओं को भी शामिल करना है।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के अनुसार प्रस्तावित योजना गरीब, मध्यम और सक्षम तीनों वर्गों की महिलाओं के लिए तैयार की जा रही है। वर्तमान में समाज कल्याण विभाग की ओर से वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही है, लेकिन सरकार इस दायरे को बढ़ाते हुए पोषण संबंधी सहायता और अन्य सुविधाओं पर भी मंथन कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पीएम पोषण योजना के तहत आसपास के विद्यालयों में पके हुए गर्म भोजन की व्यवस्था बुजुर्ग महिलाओं के लिए किए जाने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा सैनिक बहुल प्रदेश होने के कारण बड़ी संख्या में वीर नारियां और आपदा प्रभावित क्षेत्रों की बुजुर्ग महिलाएं भी इस योजना के दायरे में लाई जाएंगी।
सरकार यह भी आकलन कर रही है कि जिन महिलाओं के परिवार हैं, वहां उनकी देखभाल की स्थिति क्या है और किन मामलों में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है। योजना का उद्देश्य आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन सुनिश्चित करना है।
इस पहल के तहत पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रदेश की बुजुर्ग महिलाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली वरिष्ठ महिलाओं को सम्मान प्रदान किया जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य सरकार पहले ही एकल महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजना को मंजूरी दे चुकी है, जिसमें 75 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। अब बुजुर्ग महिलाओं के लिए अलग से योजना लाकर सरकार महिला कल्याण के क्षेत्र में अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर रही है।




