
मेरठ। मेडिकल थाना क्षेत्र में जागृति विहार के पास पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सॉल्वर गैंग के सरगना पीलीभीत के पूरनपुर निवासी रिंकू और बुलंदशहर के सलेमपुर निवासी कपिल चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी प्रादेशिक सेना की भर्ती में सेंधमारी करने मेरठ आए थे, लेकिन पुलिस की पूर्व सूचना और सटीक घेराबंदी के चलते मौके पर ही धर दबोचे गए। पुलिस ने उनकी कार से एक तमंचा, चार जिंदा कारतूस और एक सफेद कार बरामद की है। दोनों आरोपियों पर पहले भी कई विभागीय भर्तियों में सेंधमारी करने के मामले दर्ज हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी लंबे समय से सरकारी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को पास कराने का “ठेका” लेते रहे हैं। इसके लिए वे संबंधित विभाग के कुछ कर्मचारियों से पहले ही सांठगांठ कर लेते हैं और उन्हें मोटी रकम का लालच देते हैं। कर्मचारी अभ्यर्थियों की गोपनीय जानकारी गैंग को उपलब्ध कराते हैं, जिसके आधार पर रिंकू और कपिल अभ्यर्थियों से संपर्क कर लेते हैं। आरोपी परीक्षा में बैठने के लिए अपने सॉल्वरों को भेजने, दौड़ और मेडिकल टेस्ट में पास कराने जैसी सुविधाओं के नाम पर 50 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक वसूलते थे।
शनिवार को जब यह गैंग प्रादेशिक सेना की चल रही भर्ती में धांधली करने पहुंचा, तो पुलिस पहले से ही सतर्क थी। सुबह से ही जागृति विहार के पास निगरानी बढ़ा दी गई थी। इसी दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध सफेद कार को रोकने का संकेत दिया, लेकिन अंदर बैठे आरोपी भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा कर दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया। तलाशी में उनके पास अवैध हथियार भी मिला, जिससे यह साफ हो गया कि आरोपी भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अपराध को अंजाम देने की फिराक में थे।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि यह गैंग कई जिलों में सक्रिय रहा है और विभिन्न सरकारी विभागों की भर्तियों में नकल व सेंधमारी कर मोटी कमाई कर रहा था। पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में आरोपियों पर पहले भी कई मुकदमों का जिक्र है। फिलहाल पुलिस इनके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है और संबंधित विभागों के कर्मचारियों की भी भूमिका की जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वे सामान्यतः किसी भी भर्ती से एक महीने पहले ही सिस्टम में सेंध लगाने की तैयारी शुरू कर देते हैं। वे कर्मचारियों को मोटा मुनाफा देने की बात कर उनका विश्वास जीतते हैं और फिर अभ्यर्थियों को फंसाकर उनसे पैसे ऐंठते हैं। इस खुलासे के बाद मेरठ पुलिस अब पूरे राज्य में सक्रिय इस सॉल्वर नेटवर्क की जड़ें तलाशने में जुट गई है ताकि ऐसी संगठित धांधली को पूरी तरह रोका जा सके।







