
देहरादून। देहरादून पुलिस ने एक हैरान करने वाला मामला उजागर किया है, जिसमें बांग्लादेशी युवक ममून हसन ने टूरिस्ट वीजा पर भारत आकर न केवल यहां लंबे समय तक अवैध रूप से डेरा जमाए रखा, बल्कि अपनी प्रेमिका की मदद से फर्जी पहचान बनाकर सचिन चौहान नाम से देहरादून में नौकरी तक हासिल कर ली। पुलिस ने ऑपरेशन ‘कालनेमि’ के तहत दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरी कहानी का पर्दाफाश किया है।
पूरी घटना की शुरुआत साल 2019 में हुई, जब बांग्लादेश के जिला मेहरपुर निवासी 28 वर्षीय ममून हसन की फेसबुक के जरिए त्यूणी निवासी रीना चौहान से दोस्ती हुई। दोस्ती बढ़ते-बढ़ते दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए और ममून लगातार टूरिस्ट वीजा पर भारत आता-जाता रहा। देहरादून में रीना से मुलाकातें बढ़ीं और दोनों का रिश्ता और गहरा होता गया। कोविड महामारी के दौरान वीजा खत्म होने के बाद भी ममून भारत में रुका रहा और बाद में रीना को भी अवैध तरीके से बॉर्डर पार कराकर बांग्लादेश ले गया, जहां दोनों ने निकाह कर लिया।
निकाह के बाद दोनों बार-बार अवैध रूप से भारत-बांग्लादेश सीमा पार करके देहरादून लौटते रहे। देहरादून आने के बाद रीना ने अपने पूर्व पति सचिन चौहान के नाम पर ममून के लिए आधार कार्ड सहित कई फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इन्हीं दस्तावेजों पर ममून ने ‘सचिन चौहान’ बनकर शहर के एक क्लब में बाउंसर की नौकरी भी कर ली। दोनों पति-पत्नी की तरह शहर में अलग-अलग किराये के कमरों में रह रहे थे। रीना का दावा है कि वह अपने असली पति सचिन चौहान से काफी समय पहले अलग हो चुकी थी और ममून के लिए फर्जी कागजात बनवाने में कुछ स्थानीय लोगों ने उसकी मदद की।
नेहरू कॉलोनी पुलिस और एलआईयू को जब दोनों की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली, तो जांच को आगे बढ़ाया गया। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने ममून और रीना को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें पूरा सच सामने आ गया। पुलिस ने ममून के पास से फर्जी आधार कार्ड सहित कई दस्तावेज बरामद किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है, ताकि यह जांच की जा सके कि कहीं दोनों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए किसी देश-विरोधी गतिविधि को अंजाम तो नहीं दिया।
एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, ऑपरेशन ‘कालनेमि’ के तहत अवैध रूप से रह रहे और फर्जी पहचान का इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई जारी है। अभी तक अभियान में 16 बांग्लादेशी पकड़े जा चुके हैं, जिनमें नौ को डिपोर्ट किया गया है और सात को विभिन्न अपराधों में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है। ममून और रीना पर अवैध बॉर्डर पार करने और फर्जी दस्तावेज तैयार करवाने के गंभीर आरोप में कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने ममून के लिए इन फर्जी पहचानपत्रों को बनवाने में मदद की।
देहरादून में सामने आया यह मामला न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सोशल मीडिया के जरिए बने रिश्ते कैसे गंभीर कानूनी जटिलताओं तक पहुँच सकते हैं। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।






