
देहरादून। उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों को सुरक्षित बनाने और भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए अब बांस रोपण की योजना तैयार की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ों की कटिंग और प्राकृतिक ढलानों में बदलाव से भू-कटाव की समस्या बढ़ जाती है। बारिश के दौरान मिट्टी और मलबा सड़क पर आने से यातायात बाधित होता है। कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इन चुनौतियों को देखते हुए उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सहयोग से सड़कों के किनारे बांस लगाने की पहल की है।
योजना के पहले चरण में राष्ट्रीय राजमार्गों को शामिल किया गया है। इसकी शुरुआत ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से करने की तैयारी है, जहां बांस रोपण के लिए 100 हेक्टेयर भूमि का चयन कर लिया गया है।
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भू-कटाव और भूस्खलन रोकने में मिलेगी मदद
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए पहाड़ों की कटिंग और ढलानों में बदलाव करना पड़ता है। इससे कई जगह मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है और भू-कटाव का खतरा बढ़ता है। बरसात के मौसम में मिट्टी और मलबा सड़क पर आने से यातायात प्रभावित होता है। वहीं, भूस्खलन के कारण सड़क के हिस्से क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी बनी रहती है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीनाक्षी जोशी के अनुसार, बांस की जड़ें मिट्टी को पकड़ने और भू-कटाव रोकने में सहायक होती हैं। ऐसे में सड़क किनारे उपयुक्त प्रजातियों के बांस लगाने से पहाड़ी ढलानों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
दुर्घटना वाले स्थानों पर प्राकृतिक क्रैश बैरियर की उम्मीद
इस योजना का उद्देश्य केवल भू-कटाव रोकना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को भी बेहतर बनाना है। पहाड़ी सड़कों पर कई स्थानों पर तीखे मोड़ और ढलान हैं। ऐसे में अनियंत्रित वाहन सड़क से नीचे गिरकर गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
योजना के तहत सड़कों के नीचे घुमावदार और संवेदनशील स्थानों पर बांस लगाए जाएंगे। परिषद के अनुसार, दुर्घटना की स्थिति में बांस के पेड़ वाहनों की गति को रोकने में क्रैश बैरियर की तरह सहायक हो सकते हैं। हालांकि, इसे पारंपरिक सड़क सुरक्षा अवरोधकों का विकल्प मानने से पहले इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा मानकों का आकलन जरूरी होगा।
चारधाम समेत अन्य राजमार्गों पर भी होगा विस्तार
ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग के अलावा चारधाम यात्रा मार्गों और राज्य के अन्य राजमार्गों पर भी बांस रोपण के लिए भूमि चयनित की जा रही है। योजना के तहत पहले राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस प्रयोग को लागू किया जाएगा। यदि पर्वतीय क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं तो इसे राज्य राजमार्गों और अन्य सड़कों पर भी अपनाया जा सकता है।
इस पहल से पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने, ढलानों को स्थिर रखने और सड़कों के आसपास हरियाली बढ़ाने की उम्मीद है। साथ ही, सड़क किनारे बांस के रोपण से प्राकृतिक सुंदरता में भी वृद्धि हो सकती है।





