
देहरादून। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में हेंवल नदी के पुनर्जीवन के लिए चलाया गया अभियान पहाड़ी क्षेत्रों में जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का उदाहरण बनकर सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से नदी और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों को नया जीवन देने का काम किया गया है।
करीब 50 किलोमीटर लंबी हेंवल नदी सिद्धपीठ सुरकंडा मंदिर के निकट अपने उद्गम स्थल से निकलती है। रास्ते में यह क्षेत्र के विभिन्न जलस्रोतों और गाड-गदेरों का पानी समेटते हुए शिवपुरी में गंगा नदी से मिलती है। इसके जलसमेट क्षेत्र का विस्तार लगभग 26 हजार हेक्टेयर में है। आसपास के गांवों और कस्बों की एक लाख से अधिक आबादी पेयजल और फल-सब्जियों की खेती की सिंचाई के लिए इस नदी और इससे जुड़े जलस्रोतों पर निर्भर है। यह क्षेत्र के वन्यजीवन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
कुछ वर्ष पहले क्षेत्र के कई प्राकृतिक जलस्रोत और गदेरे सूखने लगे थे। कई स्थानों पर पानी का प्रवाह भी काफी कम हो गया था। इससे हेंवल नदी के प्रवाह पर असर पड़ने लगा। इस स्थिति को देखते हुए नरेंद्रनगर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने वर्ष 2018-19 में नदी के पुनर्जीवन के लिए अभियान शुरू किया।
126 जलस्रोत और 28 गदेरे किए गए पुनर्जीवित
अभियान के तहत अब तक नदी के जलसमेट क्षेत्र में 126 जलस्रोतों, 28 गदेरों और 16 रिचार्ज जोन को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए गए हैं। इसके लिए चाल-खाल, चेकडैम और पुनर्भरण गड्ढों का निर्माण करने के साथ स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इन उपायों का उद्देश्य वर्षा के पानी को बहकर निकल जाने से रोकना, उसे जमीन में समाहित करना और भूजल का पुनर्भरण बढ़ाना है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन प्रयासों के बाद जलस्रोतों और गदेरों में पानी का प्रवाह लगभग 60 प्रतिशत बढ़ा है। पहले हेंवल नदी जहां करीब एक मीटर की चौड़ाई में बह रही थी, वहीं अब इसका प्रवाह क्षेत्र 12 से 15 मीटर तक बताया गया है।
जल संरक्षण के साथ ग्रामीण आजीविका पर जोर
हेंवल मॉडल में केवल नदी और जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि स्थानीय लोगों को इनके संरक्षण और रखरखाव से जोड़ने की भी पहल की गई है। इसके लिए 34 हेंवल धारा संरक्षण समितियां बनाई गई हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण जलस्रोतों की सुरक्षा और देखभाल में भागीदारी निभा रहे हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए डेयरी, मधुमक्खी पालन और पौधशाला जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया गया है। इस तरह जल संरक्षण को आजीविका के अवसरों से जोड़ने की कोशिश की गई है, ताकि स्थानीय समुदाय लंबे समय तक इस पहल में अपनी भूमिका निभा सके।
हेंवल मॉडल के लिए वन संरक्षक धर्म सिंह मीणा को हाल ही में ईको वारियर अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में इस मॉडल का उल्लेख किए जाने पर उन्होंने प्रसन्नता जताई और उम्मीद व्यक्त की कि यह पहल दूसरे क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम में बताया कि टिहरी गढ़वाल में स्थानीय लोगों ने मिलकर हेंवल नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया। नदी में पानी कम होने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने की समस्या के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर अभियान चलाया। वर्षाजल को रोकने, पानी को जमीन तक पहुंचाने और पौधरोपण जैसे उपायों से नदी के पुनर्जीवन के साथ कई प्राकृतिक जलस्रोतों को फिर से सक्रिय करने में मदद मिली।
हेंवल नदी का यह मॉडल दिखाता है कि जल संरक्षण के लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी, वर्षाजल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एक साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।





