
देहरादून। ऋषिकेश में जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित बाईपास परियोजना के सामने अब पर्यावरण संरक्षण की चुनौती भी खड़ी हो गई है। बाईपास के तय एलाइनमेंट से करीब 3998 पेड़ प्रभावित हो रहे हैं। इसे देखते हुए वन विभाग ने कार्यदायी संस्था को पेड़ों की कटाई के लिए चिह्नित संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं। परियोजना के तहत पेड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचाने, प्रत्यारोपण की संभावनाएं तलाशने और वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखकर कुछ बदलाव करने पर काम किया जा रहा है।
13 किलोमीटर लंबा बनेगा बाईपास
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग चारधाम यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण होने के साथ सामरिक दृष्टि से भी अहम है। ऋषिकेश में सड़क की सीमित चौड़ाई और वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण अक्सर जाम की स्थिति पैदा होती है। इससे स्थानीय लोगों के साथ चारधाम यात्रा पर आने-जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी होती है।
इस समस्या के समाधान के लिए करीब एक दशक से ऋषिकेश बाईपास बनाने की कोशिश की जा रही है। 13 किलोमीटर लंबे इस बाईपास के निर्माण की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित कार्यदायी संस्था को सौंपी गई है। परियोजना के लिए करीब 47 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत बताई गई है। तय एलाइनमेंट के अनुसार, निर्माण कार्य से 3998 पेड़ प्रभावित हो रहे हैं।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
1204 पेड़ों के प्रत्यारोपण की योजना
परियोजना के लिए चिह्नित पेड़ों में से 1204 को प्रत्यारोपित करने की योजना बनाई गई है। अगस्त में वन भूमि हस्तांतरण नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने परियोजना स्थल का निरीक्षण किया था। इस दौरान प्रभावित होने वाले पेड़ों का दोबारा आकलन करने और वास्तविक आवश्यकता के आधार पर कटान के लिए चिह्नित पेड़ों की संख्या कम करने के निर्देश दिए गए थे।
वन विभाग के निर्देशों के बाद कार्यदायी संस्था भी ऐसे विकल्पों पर काम कर रही है, जिनसे निर्माण के दौरान कम से कम पेड़ प्रभावित हों। पेड़ों के प्रत्यारोपण की प्रक्रिया वन विभाग के सहयोग से पूरी किए जाने की योजना है।
जैव विविधता पार्क के पास बदलाव पर जोर
परियोजना में जैव विविधता पार्क के प्रारंभिक हिस्से में करीब 250 मीटर लंबाई के उस भाग को लेकर भी बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां सड़क भूमिगत हो रही है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की आवाजाही और यातायात को सुगम बनाने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।
वन विभाग की ओर से परियोजना के इस हिस्से में संभावित बदलावों पर ध्यान देने को कहा गया है। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि बाईपास निर्माण के दौरान वन क्षेत्र और वन्यजीवों के विचरण पर कम से कम असर पड़े।
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए 22 करोड़ का प्रावधान
परियोजना से जुड़े विवरण के अनुसार, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए देहरादून और नरेंद्र नगर वन प्रभागों के लिए 22 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। वन्यजीवों की आवाजाही और वन क्षेत्र के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए आवश्यक उपायों पर काम किया जाना है।
पेड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचाने का भरोसा
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि परियोजना में वृक्षों को कम से कम नुकसान हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पेड़ों के प्रत्यारोपण का काम भी वन विभाग के सहयोग से किया जाएगा।
ऋषिकेश बाईपास से शहर में यातायात का दबाव कम करने की उम्मीद है, लेकिन परियोजना के दौरान पेड़ों का संरक्षण और वन्यजीवों की आवाजाही भी महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। अब आगे की प्रक्रिया में पेड़ों की कटाई की संख्या कम करने, प्रत्यारोपण और परियोजना के कुछ हिस्सों में संभावित बदलावों पर ध्यान दिया जाएगा।





