
देहरादून : माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 21 सितंबर, 2026 के ऐतिहासिक आदेश के अनुपालन में आवासीय कॉलोनियों में बिना अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध देशव्यापी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसी क्रम में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की ओर से सचिव अनंत आकाश के नेतृत्व में जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट, देहरादून को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
जिसमे मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:-
1. गरीब एवं निम्न-मध्यम वर्गीय लघु दुकानदारों की आजीविका की रक्षा:
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
CPI(M) ने स्पष्ट किया कि आवासीय कॉलोनियों में संचालित छोटी दुकानें — जैसे दैनिक राशन, डेयरी, सब्जी, स्टेशनरी एवं छोटे घरेलू क्लिनिक — स्थानीय निवासियों की दैनिक आवश्यकताओं से जुड़ी हैं और अनेक गरीब तथा निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन हैं। इन पर किसी भी प्रकार की ‘पिक-एंड-चूज़’ (Pick-and-choose) या उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। पार्टी ने इनके नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
2. ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि आवासीय कॉलोनियों में बड़े होटल, लॉज, पीजी, कमर्शियल होमस्टे, बड़ी दुकानें एवं निजी अस्पताल भूमि-उपयोग बदलकर संचालित हो रहे हैं, जिनसे गंभीर पार्किंग अव्यवस्था, यातायात जाम, बाहरी एवं अज्ञात तत्वों का अनावश्यक आवागमन, ध्वनि एवं पर्यावरण प्रदूषण तथा कई आपराधिक घटनाएं घटित हो चुकी हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि बड़े पूँजीपतियों एवं होटल कारोबारियों के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं होती, बल्कि नोटिस गरीब दुकानदारों को जारी किए जा रहे हैं।
3. MDDA, पर्यटन विभाग, खाद्य विभाग, आबकारी विभाग, नगर निगम एवं राजस्व विभाग के संयुक्त सर्वेक्षण द्वारा यह जाँच सुनिश्चित की जाए कि आवासीय कॉलोनियों में किसी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान को गलत तरीके से लाइसेंस, मानचित्र स्वीकृति अथवा भूमि-उपयोग परिवर्तन तो नहीं दिया गया। ऐसे सभी लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं तथा दोषी अधिकारियों एवं एजेंसियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाए।
4. नीति के नियमों का उल्लंघन करने वाले अथवा बिना वैध कमर्शियल लैंड-यूज़ परिवर्तन के चल रहे बड़े होटलों/लॉज/पीजी/होमस्टे की पहचान कर उनके पर्यटन पंजीकरण, ऑक्युपेन्सी सर्टिफिकेट, खाद्य एवं आबकारी लाइसेंस तत्काल निरस्त किए जाएं।
5. रेजिडेंसल वेलफेयर सोसाइटियों तथा स्थानीय नागरिकों द्वारा बड़े होटलों, लॉज, होमस्टे, पीजी, बड़ी दुकानों एवं अस्पतालों से हो रही दिक्कतों की शिकायतों पर समयबद्ध जाँच एवं कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा शिकायतकर्ता को कार्रवाई की सूचना अनिवार्य रूप से दी जाए।
ज्ञापन की प्रतिलिपि,महामहिम राष्ट्रपति, माननीय मुख्य न्यायाधीश (सर्वोच्च न्यायालय), महामहिम राज्यपाल (उत्तराखंड), माननीय मुख्यमंत्री (उत्तराखंड), मुख्य सचिव, MDDA उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त (देहरादून), निदेशक पर्यटन विभाग, आबकारी आयुक्त एवं मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।
CPI(M) का यह स्पष्ट रुख है कि गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों की आजीविका को निशाना बनाना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। पार्टी ने मांग की कि कार्रवाई का दायरा केवल अवैध बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक सीमित रहे, जबकि छोटे दुकानदारों को प्रक्रियात्मक राहत देते हुए नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
यह ज्ञापन उस व्यापक जनहित का प्रतीक है, जिसमें आवासीय कॉलोनियों की शांति, सुरक्षा एवं गरीबों की रोटी-रोज़ी — दोनों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।





