
ऋषिकेश। एम्स के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सेटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। मामले में पुलिस पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब जांच का केंद्र एम्स में काम कर रही आउटसोर्स एजेंसी राजदीप इंटरप्राइजेज के मैनेजर विनायक और शिवा सिंह समेत उन लोगों की भूमिका पर है, जिनके नाम पूछताछ के दौरान सामने आए हैं।
पुलिस के मुताबिक, किच्छा सेटेलाइट सेंटर में आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से रकम लेने के आरोपों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े लोगों के नाम सामने आने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने और अभ्यर्थियों से संपर्क करने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
मामले में गिरफ्तार आरोपी दीपक गुसाईं से पूछताछ के दौरान पुलिस को नौकरी लगवाने के नाम पर अलग-अलग लोगों से रकम लिए जाने की जानकारी मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, दीपक ने कथित तौर पर इसमें से 2.40 लाख रुपये शिवा सिंह को दिए जाने की बात बताई है। वहीं, दूसरे आरोपी सुब्रत बछाड़ ने भी अपने सहित अन्य लोगों की नौकरी लगवाने के लिए रकम दिए जाने और संबंधित लोगों को शिवा सिंह तथा राजदीप इंटरप्राइजेज के मैनेजर विनायक से मिलाने की जानकारी पुलिस को दिए जाने की बात कही गई है।
जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आउटसोर्स एजेंसी से आरोपियों के कथित संपर्क को माना जा रहा है। बताया गया है कि शिवा सिंह पूर्व में इसी आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से एम्स में काम कर चुका है। वहीं, आरोपी दीपक गुसाईं वर्तमान में आयुष्मान योजना में आउटसोर्स के माध्यम से तैनात बताया जा रहा है। इन कड़ियों के सामने आने के बाद पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क करने और कथित नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित हुई।
नियुक्ति पत्रों पर एजेंसी की मोहर का दावा
मामले में नियुक्ति पत्रों पर आउटसोर्स एजेंसी की मोहर होने की बात भी जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल है। बताया जा रहा है कि एजेंसी की एक महिला कर्मचारी ने पुलिस को दिए बयान में नियुक्ति पत्रों पर कंपनी की मोहर लगाए जाने की जानकारी दी है। यह भी दावा किया गया है कि मोहर लगाने के लिए एजेंसी से जुड़े किसी प्रभावशाली व्यक्ति की ओर से निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इस दावे की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस अब नियुक्ति पत्रों, उन पर लगी मोहर, अभ्यर्थियों से हुई बातचीत और पैसों के कथित लेन-देन के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।
एजेंसी की भूमिका भी जांच के केंद्र में
मामला सामने आने के बाद से ही आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोपियों के पास कथित तौर पर एजेंसी से संबंधित नियुक्ति पत्र मिलने और उन पर एजेंसी की मोहर होने की जानकारी ने जांच को इसी दिशा में आगे बढ़ाया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यदि नियुक्ति पत्र फर्जी थे तो उन्हें तैयार करने के लिए एजेंसी से संबंधित जानकारी, दस्तावेज और मोहर आरोपियों तक कैसे पहुंची।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या सभी नियुक्तियां केवल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी दिलाने के नाम पर की जा रही थीं या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। इस संबंध में पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ दस्तावेजों और संभावित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है।
एम्स से जुड़े लोगों के संपर्क की पड़ताल
आरोपियों में कुछ लोगों के एम्स में आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से काम करने या पूर्व में काम कर चुके होने की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों को एम्स की भर्ती प्रक्रिया, आउटसोर्स एजेंसी या संबंधित पदों के बारे में कितनी जानकारी थी और उन्होंने इसी जानकारी का इस्तेमाल नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क करने के लिए किया या नहीं।
फिलहाल जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर किसी एम्स अधिकारी या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। यदि जांच में ऐसे किसी व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण सामने आते हैं तो पुलिस उसके आधार पर आगे कार्रवाई कर सकती है।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस कथित रकम के लेन-देन, नियुक्ति पत्रों की सत्यता, एजेंसी की मोहर के इस्तेमाल और आरोपियों के आपसी संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़ा कितने स्तर तक फैला था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।




