
हरिद्वार। साइबर ठगी के मामलों की जांच कर रही हरिद्वार पुलिस को एक महत्वपूर्ण कड़ी हाथ लगी है। अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों की जांच के दौरान कई संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए हैं। इन नंबरों की पड़ताल करने पर पुलिस को पता चला कि इनमें इस्तेमाल किए गए कई सिम कार्ड एक ही दुकान से जारी हुए थे। पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों और साइबर ठगी की घटनाओं के बीच सामने आए संबंध को गंभीरता से लेते हुए मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, 26 अगस्त को उप निरीक्षक मनोज गैरोला ने थाने की यूनिक यूजर आईडी से समन्वय पोर्टल पर लॉगिन कर संदिग्ध सिम से संबंधित डाटा का अवलोकन किया। साइबर सेल हरिद्वार से प्राप्त जानकारी की जांच के दौरान विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में इस्तेमाल किए गए कई संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए।
10 राज्यों की साइबर शिकायतों से जुड़े संदिग्ध नंबर
जांच में सामने आया कि संदिग्ध मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से संबंधित मामलों में किया गया है। पुलिस को दिल्ली, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल समेत 10 राज्यों में दर्ज शिकायतों में इन नंबरों के इस्तेमाल की जानकारी मिली है।
अलग-अलग राज्यों में दर्ज शिकायतों में सामने आए मोबाइल नंबरों की जानकारी एकत्र करने के बाद पुलिस ने इनके सिम कार्ड जारी होने के स्थान की पड़ताल की। इसी दौरान कई नंबरों का कनेक्शन एक ही पीओएस एजेंट से सामने आया।
बहादराबाद रोड की दुकान से जारी हुए कई सिम
पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि संदिग्ध नंबरों में कई सिम कार्ड गुलिस्तान एंटरप्राइजेज-अबरार टेलीकॉम, बहादराबाद रोड, पतंजलि विद्यापीठ क्षेत्र, रुड़की स्थित पीओएस एजेंट की दुकान से जारी किए गए थे।
एक ही दुकान से जारी हुए कई सिम कार्डों का अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में इस्तेमाल होना पुलिस के लिए जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन सिम कार्डों को किन लोगों के नाम पर जारी किया गया, इन्हें किसने इस्तेमाल किया और इनके जरिए साइबर अपराधों को किस तरह अंजाम दिया गया।
सिम जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
मामले की जांच में अब सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस यह जांच करेगी कि संदिग्ध सिम जारी करते समय जरूरी दस्तावेज और पहचान संबंधी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं या नहीं। इसके अलावा सिम कार्ड के वास्तविक उपयोगकर्ता और उन्हें उपलब्ध कराने वाले लोगों के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
संदिग्ध मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कई राज्यों में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पाए जाने के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच आगे बढ़ने पर सिम कार्ड धारकों, पीओएस एजेंट और इन नंबरों का इस्तेमाल करने वाले लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू
संदिग्ध मोबाइल नंबरों और अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों के बीच संबंध सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब पुलिस मोबाइल नंबरों से जुड़े दस्तावेज, सिम जारी करने का रिकॉर्ड और साइबर धोखाधड़ी से संबंधित उपलब्ध डाटा की जांच कर रही है।
सीओ संजय चौहान ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पुलिस संदिग्ध मोबाइल नंबरों और उनसे जुड़े साइबर धोखाधड़ी के मामलों की कड़ियों को खंगाल रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।





