
देहरादून: उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच आपदा प्रभावित मतदाताओं के लिए राहत की खबर है। यदि किसी मतदाता का घर आपदा में बह गया है या क्षतिग्रस्त हो गया है और उसके साथ जरूरी दस्तावेज भी नष्ट हो गए हैं, तो केवल दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के आधार पर उसका नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) की रिपोर्ट को नोटिस के निपटारे का आधार बनाया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बृहस्पतिवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ता के दौरान SIR की प्रगति और मतदाताओं से जुड़े विभिन्न मामलों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा की वजह से दस्तावेज खोने वाले मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि यदि किसी मतदाता का घर आपदा में बह गया और उसके साथ उसके पहचान या अन्य जरूरी दस्तावेज भी नष्ट हो गए हैं, तो संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), बीएलओ की सहायता से मामले की वास्तविक स्थिति की जांच कर नोटिस का निपटारा करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेजों के नष्ट हो जाने जैसी परिस्थितियों के कारण किसी पात्र व्यक्ति का मतदान अधिकार प्रभावित न हो।
24.30 लाख में से 20.27 लाख नोटिस तामील
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार प्रदेश में SIR की प्रक्रिया निर्धारित चरणों के अनुसार आगे बढ़ रही है। नोटिस फेज में कुल 24.30 लाख मतदाताओं के सापेक्ष अब तक 20.27 लाख नोटिस तामील कराए जा चुके हैं। यानी बड़ी संख्या में मतदाताओं तक सत्यापन से संबंधित नोटिस पहुंच चुके हैं।
इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया भी चल रही है। 14 जुलाई से पांच अगस्त तक प्राप्त आवेदनों के आंकड़ों के अनुसार फॉर्म-6 के करीब 57 हजार, फॉर्म-7 के 22,668 और फॉर्म-8 के 26,145 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों के माध्यम से नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, नाम हटाने अथवा मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सामान्य विसंगति होने पर भी सुरक्षित रहेगा वोट
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य प्रकार की विसंगतियों वाले मतदाताओं के वोट सुरक्षित हैं। ऐसे मामलों के निपटारे के लिए सरल प्रक्रिया अपनाने का प्रयास किया जा रहा है। मतदाताओं से अपील की गई है कि यदि उन्हें SIR के तहत नोटिस मिला है तो वे भ्रमित या परेशान न हों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना जवाब तथा उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत करें।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए SIR की प्रक्रिया चल रही है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने के साथ-साथ मतदाता सूची में मौजूद विसंगतियों का समाधान करना भी है।
एक व्यक्ति अधिकतम पांच मतदाताओं पर कर सकता है आपत्ति
SIR के दौरान आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी दी। उनके अनुसार कोई व्यक्ति अधिकतम पांच मतदाताओं के संबंध में आपत्ति दर्ज करा सकता है। वहीं राजनीतिक दलों के बीएलए-2 प्रतिदिन 10 मतदाताओं पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
राजनीतिक दलों से भी SIR की प्रक्रिया को लेकर लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। विधानसभा स्तर पर ईआरओ, जिला स्तर पर जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और प्रदेश स्तर पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से नियमित बैठकें की जा रही हैं, ताकि प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सके।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय सत्यापन महत्वपूर्ण
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी आपदाओं के कारण कई परिवारों के घर और सामान नष्ट हो जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेजों का सुरक्षित रहना भी मुश्किल होता है। SIR के दौरान ऐसे मतदाताओं के लिए स्थानीय स्तर पर बीएलओ की रिपोर्ट को महत्व दिए जाने से उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने में आने वाली कठिनाइयों से राहत मिल सकती है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं से अपील की है कि वे SIR को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम पर भरोसा न करें। यदि उन्हें नोटिस मिला है तो समय पर उसका जवाब दें और उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रक्रिया पूरी करें। इससे मतदाता सूची के शुद्धिकरण के साथ पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।




