
देहरादून। ऋषिकेश में बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान एक दर्दनाक हादसे में ऊर्जा निगम के आउटसोर्स लाइनमैन की करंट लगने से मौत हो गई। देर रात बिजली लाइन का फॉल्ट ठीक करने के दौरान हुए हादसे ने ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली और विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में जनरेटर से आए बैक करंट को हादसे का संभावित कारण माना गया है।
जानकारी के अनुसार मंगलवार देर रात करीब 1:20 बजे ऋषिकेश के आईएसबीटी क्षेत्र में बिजली लाइन में तकनीकी खराबी आने से विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी। सूचना मिलने पर ऊर्जा निगम की ओर से आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कार्यरत लाइनमैन प्रदीप कुमार (30) निवासी काले की ढाल, ऋषिकेश को मौके पर भेजा गया। वह ट्रांसफार्मर के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन में फॉल्ट ठीक करने का कार्य कर रहे थे।
कार्य के दौरान अचानक तेज धमाके के साथ लाइन में करंट दौड़ गया, जिससे प्रदीप कुमार उसकी चपेट में आ गए। करंट लगने के बाद वह बिजली के पोल पर ही लटक गए। घटना की सूचना मिलते ही ऊर्जा निगम के अधिकारी और अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे। काफी प्रयासों के बाद उन्हें नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए पहले राजकीय उप जिला चिकित्सालय भेजा गया, जहां से आगे की प्रक्रिया के लिए एम्स ऋषिकेश भेजा गया। पुलिस ने भी मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता शक्ति प्रसाद ने बताया कि प्रारंभिक जांच में जनरेटर से आए बैक करंट के कारण लाइनमैन के करंट की चपेट में आने की आशंका सामने आई है। हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच कराई जा रही है।
यह घटना एक बार फिर बिजली लाइनों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थल पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लाइन पर कार्य शुरू करने से पहले विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बंद होने और बैक फीड की जांच जैसी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन आवश्यक है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।




