
देहरादून: बदरीनाथ धाम के कथित चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल अब सीधे आमने-सामने आ गए हैं। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सार्वजनिक मंच पर खुली बहस की चुनौती देकर इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
बुधवार को केनाल रोड स्थित बीकेटीसी कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावा प्रकरण में उनकी भी नैतिक जिम्मेदारी है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले इस्तीफा देने का कोई सवाल नहीं उठता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की त्रिस्तरीय जांच जारी है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक बहस के लिए स्थान पहले ही तय कर दिया है। यदि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल चाहें तो बदरीनाथ या केदारनाथ धाम के पवित्र परिसर में खुली चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि गोदियाल केवल बहस की तारीख और समय तय कर दें, वह उपस्थित रहने के लिए तैयार हैं।
प्रेसवार्ता के दौरान हेमंत द्विवेदी ने गणेश गोदियाल के कार्यकाल से जुड़े कई दस्तावेज भी सार्वजनिक किए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति और बाद में उसे दिए गए अतिरिक्त दायित्वों तथा वेतनमान में बढ़ोतरी नियमों के विपरीत की गई। उनके अनुसार, नौटियाल ने वर्ष 2003 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर पद के लिए आवेदन किया था और बाद में उसे नियमित नियुक्ति मिली। इसके बाद तत्कालीन अध्यक्ष के कार्यकाल में उसे वैयक्तिक सहायक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया तथा वर्ष 2018 में ग्रेड वेतन में सीधी बढ़ोतरी की गई।
द्विवेदी ने यह भी आरोप लगाया कि गोदियाल के कार्यकाल में मंदिर समिति के धन से टिहरी के प्रतापनगर में निजी भूमि तक सड़क निर्माण पर करीब नौ लाख रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा एक निजी फर्म को डॉक्यूमेंट्री निर्माण के लिए 12 लाख रुपये और समिति के अधीन न आने वाले एक मंदिर के जीर्णोद्धार पर भी धनराशि खर्च की गई। उन्होंने दावा किया कि कई प्रस्ताव बोर्ड की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पर्याप्त सदस्यों की मौजूदगी के बिना पारित किए गए।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि मंदिर समिति की गरिमा, श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती। यदि जांच में किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हेमंत द्विवेदी के आरोपों का तीखा जवाब दिया। उन्होंने सार्वजनिक बहस की चुनौती स्वीकार करते हुए कहा कि बीकेटीसी अध्यक्ष जहां भी बहस करना चाहें, वह वहां आने के लिए तैयार हैं। जल्द ही समय और तारीख तय कर उन्हें सूचित कर दिया जाएगा।
गोदियाल ने कहा कि जिन लोगों पर भगवान की तिजोरी से चोरी रोकने की जिम्मेदारी थी, वही आज सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए बीकेटीसी अध्यक्ष को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने द्विवेदी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि प्रतापनगर में सड़क निर्माण के लिए दी गई राशि किसी निजी कार्य के लिए नहीं, बल्कि गणेश मंदिर के संपर्क मार्ग के निर्माण हेतु स्वीकृत की गई थी। इसके अलावा बिनसर और पोखरी स्थित मंदिरों में धार्मिक कार्यों के लिए भी मंदिर समिति की ओर से धन उपलब्ध कराया गया था। गोदियाल ने कहा कि इन कार्यों में किसी प्रकार का गबन नहीं हुआ, बल्कि धार्मिक और जनहित से जुड़े निर्माण कार्य कराए गए।
डॉक्यूमेंट्री निर्माण पर लगाए गए आरोपों को भी उन्होंने निराधार बताया। उनके अनुसार, मंदिरों पर आधारित फिल्म और डॉक्यूमेंट्री तैयार कर उन्हें सार्वजनिक करने से मंदिर समिति को आर्थिक लाभ हुआ और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिला।
गोदियाल ने यह भी कहा कि यदि उनके कार्यकाल में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो सरकार स्वतंत्र एजेंसी से जांच करा सकती है। उन्होंने दावा किया कि तीन वर्ष पहले उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बीकेटीसी से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया था।
चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण की जांच अभी जारी है। ऐसे में इस मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और दोनों नेताओं के बीच प्रस्तावित खुली बहस इस विवाद को और अधिक चर्चा में ला सकती है।




