
गाजियाबाद। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित निर्माणाधीन मॉल में सात वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की सनसनीखेज वारदात की जांच में पुलिस को कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, वारदात के दौरान बच्ची के विरोध और चीखने पर आरोपी ने उसके सिर पर लोहे के पाइप से जोरदार वार किया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद दोनों आरोपियों ने उसे लिफ्ट के निर्माणाधीन शाफ्ट के रास्ते बेसमेंट में फेंक दिया, ताकि घटना का जल्द पता न चल सके और साक्ष्य नष्ट हो जाएं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों को जानकारी थी कि लिफ्ट शाफ्ट के नीचे बेसमेंट के निचले हिस्से में पानी भरा रहता है। उन्हें उम्मीद थी कि शव पानी में डूब जाएगा और घटना का खुलासा काफी देर बाद होगा। हालांकि परिजनों और स्थानीय लोगों की तलाश के दौरान बच्ची का शव तीसरे बेसमेंट में बरामद हो गया, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया है कि वारदात के बाद मुख्य आरोपी विनय अपनी झुग्गी में पहुंच गया और फरार होने की तैयारी करने लगा। उसने अपने साथ आधार कार्ड और कुछ नकदी रख ली थी। इसी दौरान बच्ची की तलाश कर रहे परिजनों और अन्य मजदूरों ने उसे पकड़ लिया। पुलिस को दिए गए आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि ऐसी दर्ज थी, जिससे वह नाबालिग प्रतीत हो रहा था। प्रारंभिक स्तर पर इसी आधार पर मेडिकल परीक्षण कराया गया, लेकिन चिकित्सकीय जांच में उसकी उम्र बालिग पाई गई। पुलिस के अनुसार आरोपी सातवीं कक्षा तक पढ़ा है।
पुलिस ने घटनास्थल से खून से सने कपड़े, हत्या में प्रयुक्त लोहे का पाइप, बच्ची की चप्पल, टूटे बाल और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त कर फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिए हैं। दोनों आरोपियों के डीएनए नमूने भी सुरक्षित कर जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले को और मजबूत बनाया जा सके।
जांच अधिकारियों का कहना है कि निर्माणाधीन मॉल के तीसरे तल पर संघर्ष के स्पष्ट संकेत मिले हैं। कमरे की दीवारों और फर्श पर खून के निशान पाए गए हैं, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बच्ची ने आरोपियों का विरोध किया था। घटनास्थल के पास लिफ्ट शाफ्ट में निकले सरियों और अन्य निर्माण सामग्री का भी निरीक्षण किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम का वैज्ञानिक पुनर्निर्माण कर रही है।
पुलिस ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी अपने कब्जे में ली है। फुटेज में दोनों आरोपी बच्ची को अपने साथ ले जाते दिखाई दिए हैं। बच्ची के हाथ में चिप्स का पैकेट था, जबकि आरोपियों के पास कोल्ड ड्रिंक और अन्य सामान दिखाई दिया। पुलिस का मानना है कि बच्ची को खाने-पीने का लालच देकर निर्माणाधीन मॉल तक ले जाया गया।
वारदात के बाद मौके पर पहुंचे एक निजी सुरक्षाकर्मी ने घटनास्थल का वीडियो बनाया था, जिसमें दोनों आरोपी भीड़ से घिरे दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस ने इस वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाया है।
जांच के दौरान निर्माणाधीन मॉल के कई हिस्सों में बीयर की खाली कैन, गिलास और अन्य सामग्री भी मिली है। स्थानीय मजदूरों ने आरोप लगाया है कि रात के समय परिसर में असामाजिक तत्वों का आना-जाना रहता है और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। मजदूरों का कहना है कि शिकायत करने पर काम छूटने का डर बना रहता है, इसलिए कई बार ऐसी गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद वे खुलकर सामने नहीं आते।
पुलिस का कहना है कि इस जघन्य अपराध से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र कर लिए गए हैं। इनमें फॉरेंसिक रिपोर्ट, डीएनए साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से बरामद सामग्री शामिल है। जांच को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है और एक सप्ताह के भीतर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के लिए भी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले को मजबूत बनाकर दोषियों को शीघ्र और कठोर कानूनी दंड दिलाने का प्रयास किया जाएगा। समाचार में केवल जांच एजेंसियों द्वारा अब तक सार्वजनिक किए गए तथ्यों और पुलिस के आधिकारिक बयानों के आधार पर जानकारी प्रस्तुत की गई है।




