
देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में उल्लेखनीय वित्तीय सुधार दर्ज करते हुए घाटे की स्थिति से बाहर निकलकर 328 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। निगम की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार राजस्व में वृद्धि, बिजली चोरी पर नियंत्रण और बिलिंग दक्षता में सुधार के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई है। हालांकि, बढ़ती बिजली मांग के चलते बिजली खरीद पर होने वाला भारी खर्च अब भी निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान यूपीसीएल की कुल आय बढ़कर 11,715 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 11,032 करोड़ रुपये था। निगम के परिचालन राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। बिजली बिक्री और अन्य परिचालन गतिविधियों से होने वाली आय 10,347 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,010 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वहीं अन्य स्रोतों से निगम को 705 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई, जो पिछले वर्ष 685 करोड़ रुपये थी।
आय में वृद्धि के बावजूद निगम का खर्च भी बढ़ा है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष के दौरान कुल व्यय 11,386 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 11,098 करोड़ रुपये था। खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा बिजली खरीद पर हुआ। यूपीसीएल ने बिजली खरीदने के लिए 9,407 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि वर्ष 2024-25 में यह खर्च 9,170 करोड़ रुपये था। यानी निगम की कुल आय का बड़ा हिस्सा बिजली उपलब्ध कराने में ही खर्च हो गया।
कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य लाभों पर 509 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 474 करोड़ रुपये था। इसके अलावा बिजली व्यवस्था के रखरखाव और मरम्मत पर 507 करोड़ रुपये खर्च हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उपभोक्ता संख्या और ऊर्जा मांग के साथ इन खर्चों में और वृद्धि हो सकती है।
यूपीसीएल के लिए राहत की बात यह रही कि बिजली चोरी और लाइन लॉस को नियंत्रित करने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। निगम का संचयी एटी एंड सी (एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल) लॉस घटकर 13.58 प्रतिशत रह गया, जो पिछले वर्ष 14.55 प्रतिशत था। साथ ही बिलिंग दक्षता बढ़कर 87.92 प्रतिशत हो गई है। इससे निगम के राजस्व संग्रह में सुधार हुआ और वित्तीय प्रदर्शन मजबूत हुआ।
वित्तीय वर्ष के अंत तक निगम की कुल संपत्ति और देनदारियों का आकार भी बढ़कर 14,646 करोड़ रुपये हो गया, जबकि 31 मार्च 2025 तक यह 11,500 करोड़ रुपये था। इससे स्पष्ट है कि निगम की परिसंपत्तियों और वित्तीय गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि, गर्मियों के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग यूपीसीएल के लिए अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन करीब छह करोड़ यूनिट बिजली की मांग है। इसके मुकाबले राज्य पूल से लगभग 1.8 करोड़ यूनिट और केंद्रीय पूल से 2.1 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध हो रही है। इस प्रकार कुल 3.9 करोड़ यूनिट बिजली की उपलब्धता के बावजूद निगम को करीब दो करोड़ यूनिट बिजली खुले बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि राज्य में स्थानीय उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाए और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार किया जाए तो बिजली खरीद पर निर्भरता कम हो सकती है। फिलहाल यूपीसीएल को मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए बाजार से महंगी बिजली खरीदने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ औद्योगिक इकाइयों, विशेषकर फर्नेस आधारित उद्योगों में एक से डेढ़ घंटे तक की कटौती भी की जा रही है, ताकि घरेलू और आवश्यक उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
यूपीसीएल का ताजा वित्तीय प्रदर्शन यह संकेत देता है कि निगम ने राजस्व प्रबंधन और नुकसान नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन बिजली खरीद पर बढ़ती निर्भरता और बढ़ती मांग आने वाले समय में नई चुनौतियां भी पेश कर सकती हैं।





