
ऋषिकेश। योग, अध्यात्म, गंगा तटों और विश्वस्तरीय पर्यटन पहचान के लिए प्रसिद्ध ऋषिकेश अब बढ़ते अपराधों को लेकर भी चर्चा में है। कभी शांति, साधना और आध्यात्मिक वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर में अपराध का बढ़ता ग्राफ पुलिस और प्रशासन दोनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक क्षेत्र में लगभग 230 प्राथमिकी दर्ज होना इस बात का संकेत है कि अपराधी तत्व लगातार यहां अपनी पैठ मजबूत कर रहे हैं।
पुलिस रिकॉर्ड और हाल के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो सामने आता है कि शहर में मारपीट, चोरी, नशा तस्करी, अवैध कैसीनो संचालन, संगठित अपराध और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसी घटनाओं में वृद्धि हुई है। चिंताजनक पहलू यह भी है कि अपराधी अब पुलिस कार्रवाई से डरने के बजाय सीधे मुकाबले पर उतर रहे हैं, जिसका प्रमाण पिछले दो महीनों में हुई दो पुलिस मुठभेड़ें हैं।
ऋषिकेश में अपराध की गंभीरता को उजागर करने वाली घटनाओं में 28 मार्च को आईडीपीएल क्षेत्र में सामने आया कथित कैसीनो संचालन मामला प्रमुख रहा। पुलिस ने एक होटल में छापेमारी कर 40 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं। इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे प्रदेश को चौंका दिया था। घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया कि धार्मिक और पर्यटन नगरी में इस तरह की गतिविधियां किस प्रकार संचालित हो रही थीं।
इसी प्रकार 21 मई को काले की ढाल क्षेत्र में पर्यटकों और स्थानीय युवकों के बीच हुए विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। घटना के दौरान एक पर्यटक को निर्वस्त्र कर पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इस घटना ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए। पर्यटन पर आधारित शहर के लिए ऐसी घटनाएं उसकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती हैं।
हाल के दिनों में एक होटल में सात महिलाओं के मिलने का मामला भी चर्चा में रहा। कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे देह व्यापार से जोड़कर देखा, हालांकि पुलिस जांच में ऐसे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद इस घटना ने शहर के होटलों, गेस्ट हाउसों और किराये के आवासों की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी। पुलिस को ऐसे प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और सत्यापन व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
अपराध के बढ़ते स्वरूप का एक और संकेत पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ों से मिलता है। 8 अप्रैल को देहरादून रोड स्थित वन चौकी के पास पुलिस की मुठभेड़ हरियाणा के एक वांछित ट्रक चोर से हुई थी। इसके बाद 8 जून को खांड गांव क्षेत्र में भट्टोवाला फायरिंग कांड के फरार आरोपियों के साथ पुलिस का आमना-सामना हुआ। दोनों मामलों में शामिल आरोपी अन्य राज्यों के शातिर अपराधी बताए गए, जिससे यह आशंका भी बलवती हुई कि ऋषिकेश बाहरी अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ता शहरीकरण, पर्यटन गतिविधियों का विस्तार, किराये के मकानों की बढ़ती संख्या और बाहरी लोगों की निरंतर आवाजाही अपराध के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रही हैं। यदि समय रहते प्रभावी निगरानी और रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो स्थिति और जटिल हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में पुलिस की मौजूदगी और गश्त बढ़ी है, लेकिन अपराध की घटनाओं में कमी दिखाई नहीं दे रही। लोगों की मांग है कि नशा तस्करी, अवैध गतिविधियों और बाहरी अपराधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। साथ ही होटलों, गेस्ट हाउसों और किरायेदारों के सत्यापन अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
हालांकि पुलिस प्रशासन का दावा है कि शहर में घटित प्रत्येक प्रमुख आपराधिक घटना का खुलासा किया गया है और अपराध नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेंद्र डोबाल के अनुसार पुलिस पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य कर रही है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है।
फिर भी यह तथ्य अनदेखा नहीं किया जा सकता कि आध्यात्मिक और पर्यटन नगरी के रूप में विश्व स्तर पर पहचान रखने वाले ऋषिकेश के सामने अब कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की चुनौती पहले से अधिक गंभीर होती जा रही है। शहर की सकारात्मक छवि, पर्यटन उद्योग और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए प्रशासन, पुलिस और समाज को मिलकर प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि ऋषिकेश की पहचान अपराध नहीं बल्कि अध्यात्म, संस्कृति और शांति की नगरी के रूप में बनी रहे।





