
देहरादून: उत्तराखंड में राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित प्रशासनिक परीक्षाएं पीसीएस परीक्षा और लोअर पीसीएस परीक्षा इस समय गंभीर संकट से गुजर रही हैं। विभागों की ओर से रिक्त पदों की स्पष्ट जानकारी न दिए जाने के कारण भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह अटक गई है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
दरअसल, शासन स्तर से विभिन्न विभागों को बार-बार निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने रिक्त पदों का विवरण उपलब्ध कराएं, ताकि भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। हालांकि, अधिकांश विभाग इस दिशा में उदासीन बने हुए हैं और समय पर सूचना उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। इसी कारण शासन अभी तक उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को अधियाचन (रिक्विजिशन) नहीं भेज पाया है।
पिछले वर्ष जारी भर्ती कैलेंडर के अनुसार 17 मई को लोअर पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा और 5 जुलाई को अपर पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा प्रस्तावित थी। लेकिन अधियाचन न मिलने की स्थिति में आयोग ने फरवरी में जारी संशोधित कैलेंडर से इन परीक्षाओं को हटा दिया। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में असमंजस और निराशा का माहौल है।
कार्मिक विभाग ने 18 मार्च को सभी प्रमुख सचिवों और सचिवों को पत्र भेजकर तीन दिन के भीतर रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक केवल कुछ ही विभागों—जैसे ग्रामीण निर्माण, गन्ना विकास, राजस्व और पंचायती राज—ने सीमित संख्या में पदों की सूचना दी है। वहीं कई विभागों द्वारा भेजे गए अधियाचन में त्रुटियां पाई गईं, जिन्हें सुधारने के निर्देश दिए जाने के बावजूद संशोधित जानकारी अभी तक नहीं भेजी गई है।
स्थिति यह है कि कुछ महत्वपूर्ण पदों जैसे डिप्टी कलेक्टर, अधीक्षक कारागार, सहायक श्रमायुक्त और खंड विकास अधिकारी के सीमित पदों की ही जानकारी उपलब्ध हो पाई है। लोअर पीसीएस के अंतर्गत भी नायब तहसीलदार, आबकारी इंस्पेक्टर और कर अधिकारी जैसे पदों की सीमित संख्या ही सामने आई है।
इस पूरे मामले में सबसे अधिक असर उन युवाओं पर पड़ रहा है, जो लंबे समय से इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अनिश्चितता के कारण उनकी योजना और रणनीति प्रभावित हो रही है।
अब कार्मिक विभाग इस विकल्प पर विचार कर रहा है कि उपलब्ध पदों के आधार पर ही अधियाचन आयोग को भेज दिया जाए और शेष पदों का विवरण बाद में जोड़ा जाए। हालांकि, अधियाचन भेजे जाने के बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू होने में करीब एक माह का समय लग सकता है।
कुल मिलाकर, विभागीय सुस्ती और समन्वय की कमी के चलते उत्तराखंड में पीसीएस और लोअर पीसीएस जैसी अहम परीक्षाएं फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रही हैं, जिसका सीधा असर प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।




