
देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून स्थित एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय ने हालिया रैगिंग कांड के बाद कड़े कदम उठाने का फैसला किया है, जो राज्य के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है। कॉलेज के हॉस्टल में सीनियर एमबीबीएस छात्रों ने जूनियरों के साथ क्रूरता की हद पार कर दी, जिसकी भनक लगते ही प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई की। नौ आरोपी सीनियर छात्रों को न केवल कॉलेज से, बल्कि हॉस्टल से भी स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया, जबकि दो दोषी छात्रों पर अतिरिक्त 50-50 हजार रुपये का भारी जुर्माना ठोंका गया। यह घटना न केवल छात्रों के बीच भय का माहौल पैदा कर रही है, बल्कि पूरे प्रबंधन की नाकामी पर सवाल खड़े कर रही है।
विश्वविद्यालय अब 2026 के संबद्धता विस्तार के दौरान एंटी रैगिंग कमेटी का पुनर्गठन करने जा रहा है, जिसमें कई पुराने सदस्यों को हटाने की योजना है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस घटना का तुरंत संज्ञान लिया, जिसके बाद विवि ने कॉलेज से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। प्रबंधन की लापरवाही को देखते हुए एंटी रैगिंग कमेटी को और सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी अमानवीय घटनाओं पर लगाम लग सके। इसके साथ ही वीमेन हैरेसमेंट, डिसीप्लीन, इंटर्नल कंप्लेंट समिति सहित कुल छह महत्वपूर्ण कमेटियों की समीक्षा शुरू हो गई है, जहां सदस्यों में फेरबदल संभावित है।
यह कदम रैगिंग के बढ़ते मामलों को रोकने की दिशा में सकारात्मक है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कमेटी बदलना पर्याप्त नहीं—कठोर निगरानी, जागरूकता अभियान और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र जरूरी हैं। कॉलेज कैंपस में अब डर का साया है, जहां छात्र खुलकर पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे। विवि का यह कदम न केवल दून मेडिकल तक सीमित रहेगा, बल्कि पूरे उत्तराखंड के मेडिकल संस्थानों के लिए मिसाल कायम कर सकता है, बशर्ते इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।




