
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी पहल पर प्रदेश में चलाया जा रहा ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन की सशक्त पहचान बनकर उभरा है। इस अभियान ने सरकार और आम जनता के बीच की दूरी को समाप्त करते हुए प्रशासन को सीधे जनता के द्वार तक पहुंचाया है।
प्रदेश के सभी 13 जनपदों में न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित 204 शिविरों में अब तक 1,35,194 नागरिकों की सहभागिता दर्ज की गई है। इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीण, पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला या तहसील मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
शिकायतों का त्वरित समाधान
अभियान के दौरान कुल 17,747 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 12,776 शिकायतों का मौके पर ही सफल निस्तारण किया गया। शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को सौंपकर समयबद्ध कार्ययोजना के तहत निरंतर निगरानी में रखा गया है, ताकि कोई भी मामला लंबित न रहे।
प्रमाण पत्र और योजनाओं का लाभ
शिविरों में आय, जाति, निवास, सामाजिक श्रेणी सहित अन्य आवश्यक प्रमाण पत्रों से जुड़े 19,734 आवेदन प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 77,203 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया गया, जिससे आमजन को राहत और विश्वास दोनों मिला।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह अभियान उत्तराखंड में शासन की सोच को बदलने वाला प्रयास है। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब सरकार स्वयं जनता तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी बिना किसी बाधा के योजनाओं और सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान से न केवल प्रशासन पर जनता का भरोसा बढ़ा है, बल्कि बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगा है। सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद से त्वरित समाधान की संस्कृति विकसित हुई है।
‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान अब उत्तराखंड में गुड गवर्नेंस मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है और आने वाले समय में यह राज्य के समग्र विकास और जनकल्याण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।





