
देहरादून | देहरादून में शनिवार का दिन वकीलों के व्यापक आंदोलन के नाम रहा, जहां अपनी लंबित मांगों को लेकर सैकड़ों अधिवक्ताओं ने न केवल अदालतों का कामकाज ठप कर दिया, बल्कि शहर की मुख्य सड़कों को भी जाम कर दिया। सुबह से ही प्रिंस चौक पर वकीलों का भारी जमावड़ा शुरू हो गया। दो लंबी कतारों में वकील गांधी रोड, तहसील परिसर और दर्शन लाल चौक से होते हुए घंटाघर तक पहुंचे। इस रैली के दौरान नारेबाजी, बैज और बैनर के साथ उनका आक्रोश साफ झलक रहा था। घंटाघर पर कुछ समय रुककर वकीलों ने सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करते हुए अपनी लंबित मांगों को तत्काल पूरा करने की चेतावनी दी। इसके बाद सभी अधिवक्ता पुनः हरिद्वार रोड स्थित अदालत परिसर के बाहर बनाए गए धरनास्थल पर एकत्र हो गए और देर तक प्रदर्शन जारी रहा।
सुबह से लेकर दोपहर तक चले इस मार्च का असर पूरे शहर की यातायात व्यवस्था पर गहराई से पड़ा। प्रिंस चौक, तहसील मोड़, घंटाघर और हरिद्वार रोड पर जगह-जगह लंबा जाम लग गया। कई वाहन चालक घंटों तक फंसे रहे और पुलिस को वैकल्पिक मार्गों से यातायात चलाने के लिए कई मौके पर हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं अदालतों में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। रजिस्ट्रार कार्यालय, जिला न्यायालय और तहसील से जुड़े कई विभागों में कामकाज ठप हो गया, जिससे आम लोगों की दिक्कतें बढ़ गईं। कई लोग जो अपने मुकदमों, दस्तावेजों या अन्य सरकारी कार्यों के लिए अदालत पहुंचे थे, उन्हें लौटना पड़ा। स्थिति ऐसी थी कि कुछ समय के लिए अदालत परिसर के सभी मुख्य द्वार बंद करने पड़े, ताकि कोई अनहोनी न हो।
बार एसोसिएशन के सचिव राजबीर बिष्ट ने कहा कि संघर्ष समिति ने काफी समय पहले सरकार के समक्ष वकीलों की मांगों का विस्तृत प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अब तक कोई ठोस और भरोसेमंद आश्वासन नहीं मिला है। इस उपेक्षा से वकीलों में रोष बढ़ता जा रहा है और आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। उन्होंने बताया कि जब तक सरकार स्पष्ट जवाब नहीं देती, तब तक विरोध-प्रदर्शन की तीव्रता बढ़ाई जाएगी। शनिवार का धरना और रैली इसी दिशा में उठाया गया कदम है, ताकि सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को समझ सके।
वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा, जिससे शहर में न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल, पूरे देहरादून में वकीलों के इस आंदोलन की चर्चा रही और शहर के कई हिस्सों में इसके कारण आम जनजीवन प्रभावित होता रहा।





