
देहरादून। उपनल कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांग आखिरकार पूरी हो गई है। प्रदेश सरकार ने समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश जारी कर दिया है, जिससे पहले चरण में लगभग 5500 उपनल कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। बीते कई महीनों से कर्मचारी समान वेतनमान और नियमितीकरण की मांग उठा रहे थे और पिछले 16 दिनों से हड़ताल पर थे। सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद यह निर्णय लिया गया, जिसके तहत उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को उनके समकक्ष नियमित कर्मचारियों की तरह समान वेतन दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के हित में है, बल्कि इससे कार्यस्थलों पर न्यायसंगत और पारदर्शी वातावरण भी बनेगा।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि पहले चरण में लगभग 5500 कर्मचारियों को समान वेतन का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके बाद अन्य कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से समान काम के लिए समान वेतन देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि उपनल कर्मचारी कई वर्षों से इस मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे थे और सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
उपनल कर्मचारियों का कहना था कि वे नियमित कर्मचारियों की तरह ही काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वेतन, भत्तों और सुविधा के मामले में लगातार भेदभाव झेलना पड़ रहा था। हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से मांग की थी कि उन्हें समान वेतन के साथ-साथ भविष्य में नियमितीकरण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों में राहत और संतोष दोनों दिखाई दे रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि समान वेतन लागू होने के बाद विभागों में कार्यरत उपनल कर्मचारियों का वेतन स्तर बढ़ेगा और इससे कार्यकुशलता, मनोबल और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा। निर्णय लागू होने के बाद राज्य में उपनल व्यवस्था पर भी नए सिरे से समीक्षा की उम्मीद बढ़ गई है।
इस फैसले ने जहां कर्मचारियों के संघर्ष को सार्थकता दी है, वहीं सरकार के लिए यह संदेश देने का प्रयास भी है कि वह कर्मचारी हितों को लेकर संवेदनशील है और न्यायपूर्ण नीति अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।





