
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में एक ही ईपीआईसी (EPIC) नंबर पर अलग-अलग नाम और पिता के नाम दर्ज होने का मामला सामने आया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद सामने आई इस विसंगति ने मतदाता सूची की शुद्धता और संशोधन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने अपनी शुरुआती पड़ताल के आधार पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है, जबकि जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन ने शुरुआती जांच के आधार पर एसडीएम पूरनपुर मयंक गोस्वामी और एसडीएम अमरिया हेमंत चौधरी को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। हालांकि, दोनों अधिकारियों को मुख्यालय से संबद्ध किए जाने और मतदाता सूची में सामने आई विसंगतियों के बीच संबंध की अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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कांग्रेस की पड़ताल में सामने आई विसंगति
कांग्रेस प्रवक्ता एडवोकेट हेमंत मिश्रा के अनुसार, पार्टी ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची की नमूने के तौर पर जांच की थी। इस दौरान एक ही EPIC नंबर पर मतदाता के अलग-अलग नाम और पिता के नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
EPIC नंबर मतदाता पहचान पत्र से जुड़ी विशिष्ट पहचान संख्या होती है। इस तरह की विसंगति मिलने पर यह जांचना जरूरी हो जाता है कि रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुआ, किन प्रविष्टियों में अंतर है और संबंधित संशोधन किस स्तर पर किया गया।
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फिलहाल मामले में जांच जारी है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि ये विसंगतियां तकनीकी या रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों के कारण हुईं अथवा इनके पीछे कोई अन्य वजह है।
दो एसडीएम जिला मुख्यालय से संबद्ध
मामले की शुरुआती जांच के बाद जिला प्रशासन ने एसडीएम पूरनपुर मयंक गोस्वामी और एसडीएम अमरिया हेमंत चौधरी को जिला मुख्यालय से संबद्ध किया है। दोनों अधिकारियों का पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र से प्रशासनिक संबंध रहा है।
मयंक गोस्वामी SIR प्रक्रिया के दौरान सदर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली अमरिया तहसील में एसडीएम के पद पर तैनात थे, जबकि हेमंत चौधरी मौजूदा समय में एसडीएम अमरिया थे।
जिलाधिकारी आलोक कुमार के अनुसार, शुरुआती जांच के आधार पर दोनों अधिकारियों को मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। मामले की जांच जारी है और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी कराई जाएगी। अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें किनकी जिम्मेदारी तय होती है।
कांग्रेस ने 13,150 मतदाताओं के नाम बदलने का लगाया आरोप
प्रदेश कांग्रेस ने SIR के तहत मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बुधवार को प्रदेश मुख्यालय में प्रेसवार्ता की थी। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की अंतिम ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए।
प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 10 अप्रैल को SIR की अंतिम ड्राफ्ट सूची जारी की गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि इसके बाद जुलाई से सितंबर के बीच विधानसभा क्षेत्र संख्या 127, पीलीभीत सदर में कुछ मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC और सीरियल नंबर वही रहे।
पार्टी का कहना है कि इस तरह के बदलावों की जानकारी मतदाताओं को नहीं हो पाती, जिससे उन्हें अपने रिकॉर्ड की स्थिति का पता लगाने में परेशानी हो सकती है। कांग्रेस ने इस मामले में विधिक राय लेकर न्यायालय जाने की बात भी कही है।
ये सभी आंकड़े कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और बदलावों की प्रकृति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
हटाए गए और जोड़े गए नामों पर भी सवाल
कांग्रेस ने दावा किया है कि पीलीभीत में 884 ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, जो पार्टी के अनुसार अब भी संबंधित क्षेत्र में रह रहे हैं और इस संबंध में आवेदन भी दे चुके हैं। इसके अलावा, पार्टी ने लगभग 2,600 ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़े जाने का आरोप लगाया है, जो कथित तौर पर संबंधित स्थानों पर नहीं रहते।
कांग्रेस ने इन आंकड़ों को जोड़ते हुए कुल 16,554 मतदाता प्रविष्टियों से जुड़े कथित बदलावों का मुद्दा उठाया है। पार्टी ने मतदाता सूची की व्यापक जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, हटाए गए, जोड़े गए या बदले गए नामों की वास्तविक स्थिति, संबंधित प्रविष्टियों की वैधता और किसी भी संभावित अनियमितता की जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय की जा सकती है।
जिले की अन्य विधानसभा सीटों की सूचियों की भी पड़ताल
कांग्रेस ने पीलीभीत सदर के अलावा जिले की अन्य विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की भी पड़ताल शुरू करने की बात कही है। पार्टी यह जानना चाहती है कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी एक ही EPIC नंबर पर अलग-अलग नाम या पिता के नाम दर्ज होने जैसी विसंगतियां मौजूद हैं।
मामले में अब प्रशासनिक जांच और मतदाता रिकॉर्ड की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सामने आई प्रविष्टियों में अंतर किस कारण हुआ, क्या रिकॉर्ड में नियमानुसार संशोधन किए गए थे और आगे किसी सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।





