
देहरादून: उत्तराखंड में बदलते मौसम ने डेंगू संक्रमण के खतरे को बढ़ा दिया है। रुक-रुककर हो रही बारिश, वातावरण में बढ़ी नमी और हल्की गर्मी ने डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर दी हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। जिले में अब तक 50 लोगों में डेंगू संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सामान्यतः डेंगू के मामले सितंबर से अधिक संख्या में सामने आते हैं। इस बार समय से पहले संक्रमण के मामले बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग ने संभावित आउटब्रेक की आशंका को देखते हुए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 40 सरकारी और निजी अस्पतालों में डेंगू मरीजों के उपचार के लिए 1,662 बेड आरक्षित किए हैं। इनमें 1,530 सामान्य बेड और 132 आईसीयू बेड शामिल हैं। एम्स ऋषिकेश, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय, जिला अस्पताल सहित सभी प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को डेंगू मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अस्पतालों को क्लीनिकल प्रबंधन की पूरी तैयारी रखने, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ब्लड बैंकों में पर्याप्त रक्त भंडारण बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जंतु विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष मौसम का पैटर्न डेंगू मच्छरों के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है। लगातार बारिश के बजाय बीच-बीच में होने वाली वर्षा और नमी वाला वातावरण मादा एडीज मच्छर के अंडों के विकास और तेजी से प्रजनन के लिए उपयुक्त माना जाता है। यही कारण है कि इस बार संक्रमण का खतरा पहले की तुलना में अधिक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर सामान्यतः अधिक ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता। मादा मच्छर के शरीर में अंडे होने के कारण उसकी उड़ान क्षमता लगभग तीन फीट तक सीमित रहती है और वह अपने आसपास के सीमित दायरे में ही सक्रिय रहता है। इसलिए घरों और आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा न होने देना डेंगू की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 16 संवेदनशील क्षेत्रों को डेंगू हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। इनमें बंजारावाला, पटेल नगर, क्लेमेंटाउन, मोथरोवाला, जाखन, मेहूंवाला, लक्खीबाग और माजरा सहित अन्य इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित रूप से घर-घर जाकर लार्वा सर्वे, फॉगिंग, जागरूकता अभियान और स्रोत नष्ट करने की कार्रवाई कर रही हैं ताकि संक्रमण को फैलने से पहले नियंत्रित किया जा सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि सभी अस्पतालों को डेंगू मरीजों के उपचार के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और बुखार, शरीर दर्द या प्लेटलेट्स कम होने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि समय रहते सावधानी बरतने और सामुदायिक सहयोग से डेंगू के संभावित प्रकोप को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।




