
देहरादून: सावन के पहले सोमवार पर उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार और योगनगरी ऋषिकेश भगवान शिव की आराधना में पूरी तरह डूबे नजर आए। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सैलाब प्रमुख शिवालयों की ओर उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव और बोल बम के गगनभेदी जयघोष, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। हजारों श्रद्धालुओं ने गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री के साथ भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना की।
हरिद्वार के कांवड़ मार्ग स्थित प्रसिद्ध दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सावन के पहले सोमवार के कारण मंदिर परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने घंटों प्रतीक्षा के बाद भगवान शिव के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार यह स्थान भगवान शिव की ससुराल माना जाता है, जहां राजा दक्ष का राज्य था। धार्मिक मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव यहां विशेष रूप से विराजमान रहते हैं, इसलिए पूरे महीने इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है।
श्रद्धालुओं ने बताया कि सावन के सोमवारों पर दर्शन के लिए अत्यधिक भीड़ रहती है। इसी कारण बड़ी संख्या में भक्त सूर्योदय से पहले ही मंदिर पहुंच गए ताकि उन्हें आसानी से जलाभिषेक का अवसर मिल सके। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और शिव स्तुति का क्रम भी लगातार चलता रहा।
उधर, ऋषिकेश के सोमेश्वर महादेव, चंद्रेश्वर महादेव और वीरभद्र महादेव मंदिरों में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिरों के कपाट खुलते ही शिवभक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहा तथा मंदिर परिसर शिवभक्ति के रंग में रंगा रहा।
श्रावण मास के पहले सोमवार को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए। प्रमुख मंदिरों में पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग, यातायात नियंत्रण और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। मंदिर समितियों और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से व्यवस्थित ढंग से दर्शन करने तथा सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।
सावन के पहले सोमवार पर हरिद्वार और ऋषिकेश में उमड़ी श्रद्धा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि श्रावण मास भगवान शिव के प्रति आस्था, भक्ति और सनातन परंपरा का सबसे बड़ा पर्व है। दिनभर मंदिरों में दर्शन, जलाभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला निरंतर चलता रहा, जिससे पूरा तीर्थ क्षेत्र शिवमय वातावरण में डूबा दिखाई दिया।




