
गोवा। मानसून का मौसम प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद करने वाले यात्रियों के लिए सबसे खास माना जाता है। इसी मौसम में गोवा-कर्नाटक सीमा पर स्थित दूधसागर फॉल्स अपनी पूरी भव्यता के साथ नजर आता है। करीब 310 मीटर की ऊंचाई से गिरता यह विशाल झरना बारिश के दिनों में दूध जैसी सफेद जलधारा का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और ऐतिहासिक रेलवे ब्रिज के बीच स्थित यह झरना हर साल हजारों पर्यटकों और ट्रैकिंग प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
दूधसागर फॉल्स भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य और मोल्लेम राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है। मानसून के दौरान यहां हरियाली अपने चरम पर होती है और झरने का जलप्रवाह कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि यह समय ट्रैकिंग के लिए सबसे रोमांचक माना जाता है। हालांकि, तेज बारिश और फिसलन के कारण सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना भी जरूरी होता है।
दूधसागर पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं, लेकिन कुलेम (Kulem) ट्रेक रूट सबसे लोकप्रिय माना जाता है। लगभग 11 किलोमीटर लंबे इस ट्रेक को पूरा करने में सामान्यतः 5 से 6 घंटे का समय लगता है। रास्ते में घने जंगल, छोटे-छोटे झरने, बहते नाले और प्राकृतिक सुंदरता यात्रियों को यादगार अनुभव देती है। यह ट्रैक प्रकृति और साहसिक पर्यटन का बेहतरीन मिश्रण माना जाता है।
यदि आप हवाई मार्ग से यात्रा करना चाहते हैं तो डाबोलिम एयरपोर्ट सबसे निकट है। रेल मार्ग से आने वाले पर्यटक कुलेम या कैसल रॉक रेलवे स्टेशन तक पहुंच सकते हैं। सड़क मार्ग से मोल्लेम गांव तक टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसके बाद स्थानीय या शेयरिंग जीप की सुविधा उपलब्ध रहती है, जिससे आगे का सफर तय किया जा सकता है।
मानसून में ट्रैकिंग पर निकलने से पहले अच्छी तैयारी बेहद आवश्यक है। यात्रियों को मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज, रेनकोट, अतिरिक्त कपड़े, टॉर्च, पर्याप्त पीने का पानी, एनर्जी फूड, पावर बैंक और प्राथमिक उपचार किट अपने साथ जरूर रखनी चाहिए। बारिश के कारण कपड़े और सामान भीगने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए वाटरप्रूफ बैग या कवर का उपयोग करना भी बेहतर रहेगा।
यात्रा से पहले मौसम विभाग की ताजा जानकारी और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी अवश्य देखनी चाहिए। भारी बारिश, भूस्खलन या तेज जलप्रवाह की स्थिति में कई बार ट्रैकिंग मार्ग अस्थायी रूप से बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में किसी भी प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से बचें और अधिकृत गाइड या वन विभाग के निर्देशों का पालन करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूधसागर फॉल्स की खूबसूरती का आनंद लेते समय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहिए। झरने के अत्यधिक निकट जाकर फोटो या सेल्फी लेने से बचें, क्योंकि तेज बहाव और फिसलन दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। समूह में ट्रैकिंग करना, निर्धारित रास्तों पर चलना और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करना सुरक्षित एवं सुखद यात्रा के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।







