
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार सक्रिय मानसून और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन के साथ-साथ चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा को भी प्रभावित कर दिया है। मौसम विज्ञान विभाग के रेड और ऑरेंज अलर्ट तथा यात्रा मार्गों पर लगातार हो रहे भूस्खलन को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौसम और मार्गों की स्थिति सामान्य होते ही यात्रा दोबारा शुरू कर दी जाएगी।
गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्गों पर मौजूद सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जाए और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए। प्रशासन ने कहा है कि यह निर्णय केवल एहतियात के तौर पर लिया गया है ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।
बारिश का असर चारधाम यात्रा पर साफ दिखाई दे रहा है। अब तक चारधाम और हेमकुंड साहिब में लगभग 45 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इनमें बदरीनाथ धाम में 15.22 लाख, केदारनाथ में 14.15 लाख, गंगोत्री में सात लाख, यमुनोत्री में 6.47 लाख तथा हेमकुंड साहिब में 2.08 लाख श्रद्धालु शामिल हैं। जून की शुरुआत में प्रतिदिन 90 हजार से एक लाख तक श्रद्धालु दर्शन कर रहे थे, लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण यह संख्या घटकर दस हजार से भी कम रह गई है।
प्रदेश में तेज बारिश ने कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। राजधानी देहरादून के निचले इलाकों में जलभराव से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई कॉलोनियों में पानी घरों तक पहुंच गया, जबकि प्रमुख सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात प्रभावित रहा। पहाड़ी जिलों में लगातार वर्षा के चलते नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार सोमवार को एक राष्ट्रीय राजमार्ग, दो राज्य राजमार्ग और कुल 98 सड़कें बंद रहीं। देहरादून-मसूरी राज्य मोटर मार्ग पर भूधंसाव के कारण यातायात प्रभावित हुआ। चमोली जिले में सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग मलबा आने से बंद हो गया, जबकि जिले के 25 ग्रामीण मार्ग भी बाधित हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चंपावत, नैनीताल और टिहरी के अनेक ग्रामीण मार्गों पर भी आवाजाही ठप रही, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार कई क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई है। किच्छा में 130 मिमी, देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में 103 मिमी, हाथीबड़कला में 75 मिमी, ऊखीमठ में 77 मिमी, खटीमा में 75 मिमी तथा अल्मोड़ा में 52 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के कारण भागीरथी, अलकनंदा, पिंडर और गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है।
प्रशासन ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रखते हुए राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में जेसीबी मशीनें, राहत उपकरण और आपदा प्रबंधन टीमें पहले से तैनात की गई हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास न जाएं तथा केवल प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सलाह का पालन करें। इससे किसी भी संभावित आपदा के दौरान जन-धन के नुकसान को कम किया जा सकेगा।




